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छात्र को झूठे NDPS केस में फंसाने का आरोप, देश में 9वां रैंकिंग रखने वाले मल्हारगढ़ थाने की कार्यशैली पर हाई कोर्ट नाराज

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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यह रैंकिंग 70 मापदंडों पर आधारित थी , अपराध नियंत्रण, मामलों के निपटान की गति, स्वच्छता, पुलिस व्यवहार, कानून-व्यवस्था आदि प्रमुख आधार रहे।
छात्र को झूठे NDPS केस में फंसाने का आरोप, देश में 9वां रैंकिंग रखने वाले मल्हारगढ़ थाने की कार्यशैली पर हाई कोर्ट नाराज

मंदसौर में बस से उतारकर 18 वर्षीय छात्र सोहन को झूठे NDPS केस में फँसाने का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है। मंगलवार को इंदौर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में पुलिस की भूमिका पर कड़े सवाल उठे। अदालत ने जांच प्रक्रिया में खामियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गलत जानकारी कोर्ट को क्यों दी गई? सुनवाई के दौरान मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और स्वीकार किया कि गिरफ्तारी करने वाली टीम मल्हारगढ़ थाने की ही थी। उन्होंने माना कि प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां हुई हैं, जिसके चलते छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि पिछले प्रस्तुतिकरण में जांच अधिकारी ने गलत जानकारी क्यों दी थी और क्यों कहा था कि युवक को उठाने वाली टीम मल्हारगढ़ थाने की नहीं थी? एसपी इस पर ठोस जवाब नहीं दे सके और केवल इतना कहा कि जांच में कई गंभीर गलतियां हुई हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की, “थाने में 55 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं, फिर भी विधिक प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया?” सरकार ने तर्क दिया कि ट्रायल में सब स्पष्ट होगा, जिस पर कोर्ट ने कड़ा सवाल किया,  “क्या युवक 10 साल तक फैसले का इंतज़ार करेगा?”

29 अगस्त 2025,  बस से उतारकर थाने ले गई पुलिस, CCTV वीडियो बना मुख्य सबूत

18 वर्षीय सोहन मंदसौर से प्रतापगढ़ जा रहा था। बस में तीन-चार पुलिसकर्मी चढ़े और उसे जबरन बस से उतारकर मल्हारगढ़ थाने ले गए। शाम 5:17 बजे पुलिस ने उस पर 2.714 किलो अफीम रखने का मामला दर्ज किया और अगले दिन कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।

होनहार छात्र को पुलिस ने बना दिया NDPS का आरोपी 

परिजनों ने कहा कि सोहन पढ़ाई में होनहार है, 12वीं में फर्स्ट डिविजन से पास होने के बाद वह PSC की तैयारी कर रहा था। उनका कहना है कि बिना कारण झूठा केस बनाया गया। काफी प्रयासों के बाद ट्रैवल्स बस का CCTV वीडियो मिला, जिसमें स्पष्ट दिखता है कि सुबह 11:39 बजे पुलिसकर्मी बस में चढ़ते दिखे, सफेद शर्ट पहने सोहन को उतारकर ले जाया गया, इसी फुटेज ने पुलिस के पहले दिए गए बयान को गलत साबित कर दिया जिससे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

हाल ही में देश के श्रेष्ठतम थानों में 9वें स्थान पर सम्मानित हुआ है मल्हारगढ़ थाना

गौर करने वाली बात यह है कि जिस मल्हारगढ़ थाने पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, उसे हाल ही में देश के श्रेष्ठतम पुलिस थानों की रैंकिंग में 9वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार रायपुर में आयोजित डीजीपी कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदान किया था। यह रैंकिंग 70 मापदंडों पर आधारित थी , अपराध नियंत्रण, मामलों के निपटान की गति, स्वच्छता, पुलिस व्यवहार, कानून-व्यवस्था आदि प्रमुख आधार रहे।

कैबिनेट बैठक में भी सराहना मिल चुकी है मल्हारगढ़ थाने को 

मध्य प्रदेश से टॉप-10 में शामिल होने वाला यह एकमात्र थाना था, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कैबिनेट बैठक में सराहा और पुलिस टीम को बधाई देते हुए राज्यस्तरीय पुरस्कार की घोषणा की थी। एसपी विनोद कुमार मीणा ने भी इसे जनता के सहयोग का परिणाम बताया था। अब इसी पुरस्कारप्राप्त थाने पर NDPS केस में लापरवाही और फर्जी गिरफ्तारी के आरोप लगना बड़ा विरोधाभास बन गया है।

NDPS एक्ट, सजा 10 से 20 साल तक

जिस केस में छात्र को आरोपी बनाया गया है, उसमें मिली मात्रा NDPS एक्ट के तहत गंभीर मानी जाती है। साबित होने पर सजा 10 से 20 साल तक हो सकती है। मंदसौर-नीमच क्षेत्र पहले भी मादक पदार्थों के मामलों में चर्चा में रहा है, इसलिए हाईकोर्ट इस केस को विशेष संवेदनशीलता से देख रहा है। अब नजर हाईकोर्ट के आदेश पर है, जो तय करेगा कि छात्र के भविष्य और पुलिस जिम्मेदारी पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। यह मामला कानून, प्रशासन और पुलिस व्यवस्था तीनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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