चर्चाओं में यह वायरल वीडियो, सिंधिया के पीए पर कांग्रेस ने की एफआईआर की मांग

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) के लिए 3 नवंबर को मतदान (Voting) होना है| उससे पहले सियासी पारा लगातार उछाल मार रहा है| इस बीच कांग्रेस (Congress) ने साल 2018 के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया के निजी सचिव पराशर द्वारा भांडेर से पूर्व विधायक एवं वर्तमान भाजपा प्रत्याशी रक्षा सिरोनिया के पति संतराम सिरोनिया से टिकट के बदले 1 करोड़ रूपये कि मांग एवं 25 लाख रूपए के लेनदेन का आरोप लगाया है।

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी (ग्वालियर-चम्बल संभाग) के.के. मिश्रा (KK Mishra) ने गुरूवार को ग्वालियर रेंज के आईजी मनेाज शर्मा (IG Manoj Sharma) को इस सम्बन्ध का 6.33 मिनट का वीडियो और पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर की मांग की है| पिछले दिनों कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से यह वीडियो जारी भी किया था|

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर राजनैतिक सुचिता और आर्थिक भ्रष्टाचार से संबद्ध है। लिहाजा, ऐसे मामलों में कोताही बरतना भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिये जाने के ही समान होगा। मिश्रा ने पुनः दोहराया है कि कांग्रेस के वरिष्ठतम नेता व पूर्व मंत्री गोविंद सिंह से रक्षा सिरोनिया के पति इस वीडियो में सार्वजनिक रूप से कह रहे है कि पाराशर ने सिंधिया के कहने पर उनसे टिकट के एवज में 1 करोड़ रूपयों की मांग की है, नहीं दिये जाने पर किसी कमलापत को टिकट दिये जाने को भी कहा| यहीं नहीं संतराम ने पाराशर के साले अनूप दांतरे को उनके कहने पर 25 लाख रूपये की डिलिवरी भी कर दी थी। यह बात संतराम ने डॉ. गोविंद सिंह के अतिरिक्त सेंवडा से कांग्रेस के निर्वाचित मौजूदा विधायक घनश्याम सिंह को भी बताई है। चर्चा में किसी दत्तीगांव का भी जिक्र आया है, जिसमें उन्होंने भी संतराम को यह कहा है कि महाराज सिंधिया ही कह रहे है कि पैसे जमा कराईये|

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मिश्रा ने आगे कहा कि इस प्रकरण के पहले भी विगत विधानसभा चुनाव (2018) में टिकट को लेकर इस चुनाव में अशोक नगर (गुना) से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही श्रीमति आशा दोहरे की सासु मां श्रीमति अनिता जैन से भी पाराशर द्वारा टिकट के एवज में 50 लाख रूपयों के लेनदेन का ऑडियो सार्वजनिक हुआ था, जिसकी शिकायत गत जून, 2020 कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने तत्कालीन ए.डी.जी. राजाबाबू सिंह को की थी, किंतु उसकी विवेचना भी अभी नहीं हुई है। लिहाजा, आई.जी. ग्वालियर से कांग्रेस का आग्रह है कि इन दोनों ही ऑडियो और वीडियो की सायबर सेल से जांच व इनमें सामने आये उल्लेखित नामों के बयान दर्ज करवाकर दोषियों के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करने के निर्देश दिए जाएँ|