अयोध्या के बाद इन 4 मामलों पर टिकी देश की निगाहें, रिटायरमेंट से पहले CJI सुनाएंगे फैसला

नई दिल्ली।

सालों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर आखिरकार शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना ही दिया है।  अब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को 4 अन्य प्रमुख मामलों में फैसला सुनाना है। इनमें  राफेल विमान घोटाला, सबरी माला, राहुल गांधी का चौकीदार चोर है और खुद सीजेआइ को आरटीआइ के दायरे में लाने के मामला शामिल है।अयोध्या फैसले के बाद देशभर की निगाहें इन 4 बड़े मामलों पर टिक गई है। उम्मीद की जा रही है कि रिटायरमेंट के पहले रंजन गोगोई इन महत्वपूर्ण मामलों पर भी फैसला सुना सकते है। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह इन बाकी चारों मामले में फैसला सुना सकता है।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश 

इसी साल छह फरवरी को सीजेआई के नेतृत्‍व वाली पांच जजों की पीठ ने 65 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था। इसमें 57 याचिकाएं 28 सितंबर 2018 के कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार करने को दाखिल की गई थीं और 28 याचिकाएं हर उम्र की महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश की अनुमति देने के खिलाफ लगाई गई थीं। याचिकाकर्ताओं की दलील है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं, इसलिए 10 से 50 साल के बीच की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं देनी चाहिए।  पहाड़ी मंदिर इस साल 16 नवंबर को वार्षिक उत्सव के लिए खुलेगा। केरल ने पिछले साल लगभग तीन महीने लंबे वार्षिक तीर्थयात्रा के दौरान उच्च नाटक देखा था, जिसमें 10-50 आयु वर्ग की लगभग एक दर्जन महिलाओं को सबरी माला मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद सभी महिलाओं के लिए दरवाजे खोले जाने के बाद श्रद्धालुओं ने विरोध किया।  

राफेल पर सरकार सही या गलत

फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने में एनडीए सरकार द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्लीनचिट दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिकाएं हैं, जो नरेंद्र मोदी सरकार को फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट की खरीद पर क्लीन चिट दे रही हैं। कोर्ट ने 36 राफेल विमानों की खरीद के सौदे की कोर्ट की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग खारिज कर दी थी जिसे भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुनौती दी है। अदालत ने 10 मई को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।   इस पर भी निर्णय दिया जाना है।

आरटीआई के दायरे में सीजेआई हों या नहीं

सर्वोच्च न्यायालय के महासचिव और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी द्वारा 2010 में दायर अपीलों पर भी फैसले की उम्मीद है कि CJI का कार्यालय RTI अधिनियम के दायरे में आता है। पांच न्यायाधीशों वाली CJI की अगुआई वाली संविधान पीठ ने 4 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपनी रजिस्ट्री द्वारा दायर अपीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत और भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय अधिकार के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण का गठन करता है। आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने यह याचिका दाखिल की थी।

राहुल गांधी का ‘चौकीदार चोर है’ भी शामिल 

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौकीदार चोर है कहकर संबोधित किया था, इस मामले में भी कोर्ट में केस दायर किया गया था। इस केस में भी फैसला सुनाया जाना है। इस साल मई में, गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी थी और भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की याचिका पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही को बंद करने की मांग की थी। हालांकि CJI ने फैसले को बरकरार रखते हुए उसे बंद नहीं करने का फैसला किया। ये भी एक महत्वपूर्ण मामला है