मार्च के पहले सप्ताह में हो सकता है लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान

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नई दिल्ली| लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही समय बाकी है| राजनीतिक दलों के साथ ही चुनाव आयोग भी आम चुनाव की तैयारी में जुट गया है| इस बीच खबर है कि लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान मार्च के पहले हफ्ते में हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को इसके संकेत मिले हैं कि चुनाव आयोग 2019 के लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च के पहले सप्ताह में कर सकता है। देश में चुनाव 6 से 7 फेस में होना संभावित है।

मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो रहा है। आम चुनाव कितने चरण और किन महीनों में होंगे, अभी इस पर चुनाव आयोग में फैसले की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग चरणों के निर्धारण के साथ ही यह तय करने में जुटा है कि इलेक्शन किस महीने में कराए जाएं| उम्मीद है कि मार्च के पहले हफ्ते में ही आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर देगा। वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है जिसके चलते राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां भी तेज कर दी है| आयोग ने सभी प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ पिछले हफ्ते बैठक करने के बाद अपना फाइनल होमवर्क शुरू कर दिया है| चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला कलेक्टरों के साथ बैठक की जा रही है|  5 साल पहले 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी मार्च के पहले हफ्ते यानी 5 मार्च को हुआ था| तब चुनाव आयोग ने 9 चरणों में आम चुनाव और 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की थी| हालांकि इस बार आम चुनाव के साथ-साथ 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं|

चुनाव कितने चरण में होंगे, यह सुरक्षा बलों की उपलब्धता और अन्य जरूरतों पर निर्भर करेगा| वहीं आंध्र, सिक्किम, ओडिशा और अरुणाचल विधानसभा के चुनाव भी आम चुनाव के साथ ही होना संभव है| इसके अलावा जम्मू और कश्मीर विधानसभा के चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं| सिक्किम, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा विधानसभा के चुनाव तो पिछली 2 लोकसभा के चुनाव के साथ ही होते रहे हैं| लेकिन इस बार जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव भी साथ हो सकता है| अगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव इस बार साथ होता है तो 2024 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव में यह क्रम टूट जाएगा क्योंकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है|  जम्मू-कश्मीर में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है। ऐसे में 6 महीने के भीतर वहां पर विधानसभा चुनाव कराया जाना जरूरी है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा नवंबर 2018 में भंग की गई थी। यहां चुनाव कराए जाने की समय सीमा मई तक है। ऐसे में वहां लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।