राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दिल्ली में आज विपक्ष की बड़ी बैठक

राष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम आने के बाद सत्तादल एवं विपक्ष दोनों ने ही तैयारियां तेज कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरफ से उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है, लेकिन इससे पहले ही 18 जुलाई को चुनाव होने के बाद 21 जुलाई को देश को 16वां राष्ट्रपति मिल जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम आने के बाद सत्तादल एवं विपक्ष दोनों ने ही तैयारियां तेज कर दी है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरफ से उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है।

लेकिन इस बीच सत्तादल ने सहयोगियों से मिलना वहीं विपक्षी दलों ने एकजुट होना शुरू कर दिया है।

ममता ने बुलाई दिल्ली में बैठक

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा में बीजेपी को पटखनी देने के बाद अब राष्ट्रपति चुनाव में भी मात देने की फिराक में है, इसीलिए उन्होंने बुधवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। ममता बनर्जी आगामी चुनाव के मद्देनजर विपक्ष को एकजुट करने में लगी हुई है। इससे पहले उनकी मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार से हो चुकी है। दूसरे नेताओं को भी वे समय-समय पर पत्र लिख साथ लाने का प्रयास कर रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर होने जा रही इस बैठक को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक, ममता ने विपक्ष के 8 सीएम सहित 22 नेताओं को चिट्ठी लिखकर बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी शामिल हैं। बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी के शामिल होने के कयास भी लगाए जा रहे है।

कांग्रेस की तरफ से इस बैठक में वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कर्नाटक के पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी और पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा इस बैठक में हिस्सा लेंगे।

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शरद पवार को दिया उम्मीदवार बनने का प्रस्ताव

ममता बनर्जी ने बैठक से पहले शरद पवार से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने का प्रस्ताव दिया लेकिन पिछली बार की तरह उन्होंने इस बार भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इससे पहले कांग्रेस और शिवसेना भी एनसीपी प्रमुख को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना चाहती थी।