कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर, सभी छुट्टियां निरस्त, राज्य सरकार ने जारी किए ये निर्देश

विभाग के सभी कर्मचारियों समेत फील्ड स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

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शिमला, डेस्क रिपोर्ट। हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। पशुपालन विभाग के सभी कर्मचारियों समेत फील्ड स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।लंपी रोग के बढ़ते संक्रमण को लेकर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया गया है।पहली बार पशुपालन विभाग की तरफ से 6 गोशालाओं को भी कवर किया गया।

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दरअसल, अन्य राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश में लंपी का खतरा बढ़ने लगा है, आए दिन पशुओं की मौत हो रही है। सोलान जिले में अभी तक लंपी से 92 पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि 2,800 पशु संक्रमित हो चुके हैं, ऐसे में पशुपालन विभाग ने  टीकाकरण का काम तेजी से शुरू कर दिया है। पंचायतों से भी पशुओं की सूची मांगी जा रही है। इसके आधार पर पशुओं का वैक्सीनेशन किया जाएगा।

इधर, होशियारपुर जिले के प्रत्येक पशु अस्पताल के चार कर्मियों की एक टीम बनाई गई है। टीम अपने क्षेत्र के सभी गोवंश का टीकाकरण करेगी।होशियारपुर उपमंडल के अधीन 6 गोशाला में अब तक 1200 से अधिक गोधन को टीका लगाया जा चुका है। जिले में इस समय 1 लाख 51 हजार 907 गाय रजिस्टर्ड हैं।  टीकाकरण की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। गोवंश लंपी से ग्रसित हो गए हैं, उन्हें टीका नहीं लगेगा।

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राज्य सरकार की तरफ से जारी निर्देश के अनुसार पहले गोशाला व पशुपालक के पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। इसके बाद शहर की सड़कों पर घूम रहे गोवंश को पकड़कर गोशाला या कहीं अन्य जगह में रखा जाएगा। वहां एक सप्ताह तक उनकी देखरेख होगी। इसके बाद टीकाकरण किया जाएगा क्योंकि लंपी वायरस से ग्रसित पशु का टीकाकरण नहीं किया जाता है।

वही पशुपालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा है कि पशुधन में लंपी चर्म रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाते हुए अभी तक लगभग 50000 पशुओं का टीकाकरण पूर्ण कर लिया गया है। पशुपालन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। रोग को नियंत्रित करने के लिए कंटेनमैंट जोन स्थापित किए गए हैं और रोग से ग्रसित पशुधन को अलग कर इस रोग को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

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पशुपालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा है कि विभाग के पास वर्तमान में टीके की 119591 खुराकें उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर खुले बाजार से भी दवा अथवा टीका खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालकों से आग्रह किया है कि वे इस रोग की रोकथाम में विभाग को सहयोग करें और किसी भी प्रकार की शंका इत्यादि के निवारण के लिए नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क कर सकते हैं।