ED ने वीवो कंपनी के 44 ठिकानों पर मारा छापा, जानें क्या है मामला

ED की कई टीमें सुबह से अलग-लाग जगहों पर छापेमारी कर रही हैं। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी पहले से जांच कर रही है।

नई दिल्ली,डेस्क रिपोर्ट। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को चाइनीज कंपनी वीवो (Vivo) व उससे संबंधित कंपनियों के तकरीबन 44 ठिकानों पर छापा मारा है। बता दें कि ईडी ने मनी लांड्रिंग के मामले में उत्तर प्रदेश व बिहार समेत देश के कई राज्यों में कार्रवाई की है। ED की कई टीमें सुबह से अलग-लाग जगहों पर छापेमारी कर रही हैं। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी पहले से जांच कर रही है।

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बता दें कि LAC पर टकराव के बाद भारत सरकार ने चीनी कंपनियों पर सख्त रुख अख्तियार किया था। उसके बाद से ही वीवो भी IT और ED के रडार पर है। अप्रैल में जांच की मांग की गई थी कि क्या वीवो की ऑनरशिप और फाइनेंशियल रिपोर्ट में गड़बड़ी है या नहीं? ED, CBI के साथ कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी इन कंपनियों से जुड़े फर्मों पर कड़ी नजर रखे हुए है।

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गौरतलब है कि वीवो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का इससे पहले गुरुग्राम स्थित एचएसबीसी बैंक का खाता अटैच कर राज्य वस्तु एवं सेवाकर (SGST) ने 220.13 करोड़ रुपये की वसूली की थी। 2020 में नियमों का उल्लंघन कर रिटर्न दाखिल करने के दौरान 110.06 करोड़ रुपये अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने के मामले में यह कार्रवाई की गई है। ज्ञातव्य है कि फरवरी से सितंबर 2020 तक कंपनी की ओर से दाखिल की गई जीएसटी रिटर्न की जांच कराई गई थी। डाटा मूल्यांकन के आधार पर पता चला कि दाखिल रिटर्न से 110.06 करोड़ रुपये अधिक का आईटीसी क्लेम किया गया है। कंपनी पर एक्शन हुआ तो आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई। लेकिन कोर्ट की तरफ से कोई राहत नहीं मिली।

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वीवो से पहले Xiaomi ग्रुप भी जांच के दायरे में है। ईडी का कहना है कि बेंगलुरु स्थित ऑफिस से अप्रैल में ED ने 5,551 करोड़ रुपए की रकम जब्त की थी। कंपनी पर अपनी कमाई को गैरकानूनी तरीके भारत से बाहर भेजने का आरोप था। कंपनी ने यह हेराफरी इसी महीने फरवरी में की थी, जिसके बाद संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की गई थी।

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देश में मोबाइल मार्केट में चाइनीज कंपनियों का बहुत दबदबा है। शाओमी (Xiaomi), ओप्पो (Oppo) और वीवो (Vivo) जैसी कंपनियां अच्छी कमाई कर रही हैं। इन सभी कंपनियों पर पिछले कुछ सालों के दौरान रेगुलेटरी फाइलिंग और दूसरी तरह की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी करने का आरोप है। इसके साथ ही देश के बाहर पैसा भेजने का भी आरोप है, जिसके बाद सरकार ने सभी के खिलाफ बड़ी जांच शुरू की थी। यह जांच कई एजेंसियां कर रही हैं।