कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन संशोधन पर हो सकता है महत्वपूर्ण फैसला, आंदोलन की तैयारी, हुई वेतन वृद्धि, नए वेतन आयोग-ओपीएस का मिलेगा लाभ!

कर्मचारियों के वेतन को हर 5 साल में संशोधित किया जाता है लेकिन राज्य में ऐसा नहीं हो रहा है। वही यह आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार द्वारा केपीटीसीएल कर्मचारियों को छोड़कर सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया गया। इसलिए उन्हें भी इसका लाभ तत्काल प्रभाव से मिलना चाहिए। माना जा रहा है कि कर्मचारी और सरकार मिलकर बीच का रास्ता निकाल सकते हैं। वही सरकार कर्मचारियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है।

Employees New Pay Commission, Pay Revision : कर्मचारियों द्वारा एक तरफ जहां नए वेतन आयोग की मांग की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के वेतन में 17 फीसद की वृद्धि की गई है। साथ ही नए वेतन आयोग के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी द्वारा रिपोर्ट सौंपी जाने के साथ ही नए वेतन आयोग की घोषणा कर दी जाएगी। इसका लाभ कर्मचारियों को मिलेगा। इसी बीच कर्मचारियों द्वारा वेतनमान संशोधन की मांग को लेकर 16 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी गई है। वहीं 60000 कर्मचारियों सहित 40000 पेंशनर मांग पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरने को तैयार है।

कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत काम करने वाले बिजली कर्मचारी वेतनमान संशोधन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इससे पहले कर्मचारियों का कहना है कि हमारा वेतनमान संशोधन 1 अप्रैल 2022 को होना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बोर्ड की मंजूरी के बावजूद 15 सितंबर को सरकार ने लागू करने का अनुरोध किया था लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। यदि संशोधन को लेकर कोई फैसला नहीं होता है तो 100000 से अधिक कर्मचारी सरकार का विरोध करेंगे।

एस्मा अधिनियम का किया जा सकता है इस्तेमाल

इसके साथ ही निदेशक तकनीकी से लेकर लाइटमैन और पावर मैन तक अधिकांश कर्मचारी हड़ताल में भाग लेंगे। राज्य भर के बिजली सेवा पूरी तरह प्रभावित होने के भी आसार जताए जा रहे हैं। वहीं सूत्रों की माने तो बिजली सेवा आवश्यक सेवाओं के तहत आती है, इसलिए कर्मचारियों के खिलाफ एस्मा अधिनियम का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बिजली कर्मचारियों की मांग

इससे पहले सोमवार को बेंगलुरु की बेस्कॉम कार्यालय में कर्मचारी और यूनियन नेताओं की बैठक आयोजित की गई थी। यूनियन में दावा किया गया था कि आंदोलन के बारे में सूचित किया गया है, उन्हें केपीटीसीएल से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन को हर 5 साल में संशोधित किया जाता है लेकिन राज्य में ऐसा नहीं हो रहा है। वही यह आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार द्वारा केपीटीसीएल कर्मचारियों को छोड़कर सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया गया। इसलिए उन्हें भी इसका लाभ तत्काल प्रभाव से मिलना चाहिए।

मामले में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मीपति का कहना है कि सरकार से 1 अप्रैल से पहले वेतन में संशोधन की पुष्टि करने के लिए एक आदेश पारित करने की मांग की गई है। बीते 6 वर्षों में वेतन में संशोधन नहीं किया गया है। कर्मचारी वित्तीय संकट में है और आंदोलन के कारण होने वाली समस्याओं के लिए किसी भी तरह से हम जिम्मेदार नहीं हैं।

सरकार कर चुकी है बड़ी घोषणा

बता दें कि इससे पहले राज्य में सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए समिति का गठन किया गया था। 2022 अक्टूबर महीने में हुई समिति गठन के बावजूद अभी तक नए वेतन आयोग को लागू नहीं किया गया है। जिस पर कर्मचारी द्वारा लगातार रोष व्यक्त किया जा रहा है। वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री बोम्मई का कहना था कि अंतिम रिपोर्ट पेश किए जाने के साथ ही नए वेतन आयोग को लागू किया जाएगा। वहीं कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए कर्नाटक के कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की गई थी। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना पर भी तैयारी की जा रही है।

निकल सकता है बीच का रास्ता

पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी समिति का गठन किया जाएगा। 2 महीने में समिति को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में आगे कार्य शैली अपनाई जाएगी। इसी बीच अब एक बार फिर से कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड सहित सभी पांच बिजली आपूर्ति कंपनियों के कर्मचारी की अनिश्चितकालीन हड़ताल पर एक बार फिर से सरकार के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। माना जा रहा है कि कर्मचारी और सरकार मिलकर बीच का रास्ता निकाल सकते हैं। वही सरकार कर्मचारियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है।