बजट 2024 : कर्मचारियों को मिल सकते है 4 बड़े तोहफे, सैलरी में आएगा बंपर उछाल! क्या लागू होगा 8वां वेतन आयोग?

इससे पहले सातवें वेतन आयोग का गठन साल 2014 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था, जो 1 जनवरी 2016 को लागू हुआ था। इसमें फिटमेंट फैक्टर को आधार मान 2.57 गुना की वृद्धि और बेसिक सैलरी 18000 रुपए की गई।

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Budget 2024 : 23 जुलाई को केन्द्र की मोदी सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करने जा रही है, ऐसे में इस बजट से हर वर्ग को बड़ी उम्मीदें है। इसमें कर्मचारियों,पेंशनरों, नौकरीपेशा, किसानों और टैक्सपेयर्स को टैक्स में छूट को लेकर कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।खास करके केन्द्रीय कर्मचारियों पेंशनरों को भी 4 बड़ी सौगातें मिलने की उम्मीद है। इसमें 8वां वेतन आयोग, 18 महीने का डीए एरियर, एनपीएस पेंशन ग्यारंटी और न्यूनतम पेंशन की लिमिट शामिल है।

लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग

  • बजट सत्र से पहले 8वें वेतन आयोग की चर्चा तेज हो गई है, चुंकी अबतक हर दस साल में नया वेतन आयोग लागू होता हुआ आया है। अगर 10 साल के पैटर्न के हिसाब से 2025-26 में मोदी सरकार 8वां वेतन आयोग लागू करती है तो इससे वेतन में 44.44% की वृद्धि देखने को मिल सकती है।इससे करीब 48.62 लाख कर्मचारियों और 67.85 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। 8वां वेतन आयोग लागू होते ही फिटमेंट फैक्टर भी 2.57 से बढ़कर 3.68 हो जाएगा, इससे न्यूनतम वेतन 26000 तक पहुंच सकता है। इससे कर्मचारियों के वेतन में संभावित वृद्धि ₹20,000 से ₹25,000 तक हो सकती है।
  • इससे पहले सातवें वेतन आयोग का गठन साल 2014 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था, जो 1 जनवरी 2016 को लागू हुआ था। इसमें फिटमेंट फैक्टर को आधार मान 2.57 गुना की वृद्धि और बेसिक सैलरी 18000 रुपए की गई। अब साल 2026 में सातवें वेतन आयोग लागू हुए 10 साल पूरे हो जाएंगे, ऐसे में अब नए वेतन आयोग की मांग तेज हो चली है, हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से वेतन आयोग को लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है।

18 महीने के डीए एरियर पर हो सकता है फैसला

  •  बजट से पहले संयुक्त सलाहकार मशीनरी एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद के सचिव ने पीएम नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है और बकाया डीए एरियर को जारी करने की मांग की है।केन्द्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2020 से जनवरी 2021 तक का डीए का एरियर बकाया है, चुंकी 4 साल पहले कोरोना काल में केन्द्र सरकार ने 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों व 64 लाख पेंशनभोगियों के DA/DR पर रोक लगा दी गई थी और कर्मचारियों का उक्त भुगतान रोक कर 34,402.32 करोड़ रुपये बचा लिए थे।
  • इसके लिए कर्मचारी संघ लंबे समय से मांग कर रहे है और कई बार केन्द्र को पत्र भी लिख चुके है, लेकिन अबतक कोई फैसला नहीं हो पाया है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी जनवरी अंत में भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव मुकेश सिंह ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा था और एरियर जारी करने का आग्रह किया था।

NPS के तहत 50% पेंशन ग्यारंटी पर लग सकती है मुहर

केंद्रीय कर्मचारियों को NPS पेंशन पर 50 फीसदी गारंटी की घोषणा करने की उम्मीद है। पेंशन गारंटी को स्वीकृति मिलने के बाद जो कर्मचारी 50,000 रुपये के अंतिम वेतन पर रिटायर होंगे, उन्हें हर महीने पेंशन के रूप में 25,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। हालांकि कर्मी द्वारा की गई नौकरी का समय और पेंशन कोष से कर्मचारी द्वारा किसी भी तरह की निकासी का समायोजन किया जाएगा। बता दे कि पिछले साल 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद वित्त सचिव टीवी सोमनाथन के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया था।इस कमेटी का मकसद नॉन कंट्रीब्यूटरी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर वापस लौटे बिना नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत पेंशन लाभों में सुधार के तरीकों का पता लगाना था।

प्रोविडेंट फंड के तहत सैलरी लिमिट बढ़ेगी?

  • संभावना है कि बजट में केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि (Employees Provident Fund) में योगदान करने के लिए वेतन की न्यूनतम सीमा (Minimum Basic Salary) में वृद्धि को लेकर कोई ऐलान कर सकती है। अभी न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये है, जिसे बजट में बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा सकता हैं। इस प्रस्ताव को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने तैयार किया है।अगर सरकार आगामी बजट में मौजूदा लिमिट बढ़ाती है, तो इस योजना के तहत आने वाले नए कर्मचारियों को अपने सैलरी स्ट्रक्चर में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है।
  • पीएफ अकाउंट और पेंशन खाते में अधिक रकम जाएगी। अभी अधिकतर राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 18,000 से 25,000 रुपये के बीच है। इस लिमिट को बढ़ाने से सरकार और निजी क्षेत्र दोनों पर भारी वित्तीय प्रभाव पड़ेगा।इससे पहले न्यूनतम वेतन सीमा में दस साल पहले यानी 1 सितंबर 2014 को वृद्धि हुई थी, उस समय न्यूनतम वेतन सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई थी।

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Pooja Khodani

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। "कलम भी हूँ और कलमकार भी हूँ। खबरों के छपने का आधार भी हूँ।। मैं इस व्यवस्था की भागीदार भी हूँ। इसे बदलने की एक तलबगार भी हूँ।। दिवानी ही नहीं हूँ, दिमागदार भी हूँ। झूठे पर प्रहार, सच्चे की यार भी हूं।।" (पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर)

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