पूर्व मंत्री सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी करार, 12 नवंबर को होगी सजा पर सुनवाई

डेस्क रिपोर्ट। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समेत तीन को लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है। जबकि इसी मामले में गायत्री का गनर और पीआरओ समेत चार साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिए गए हैं। 18 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति व अन्य छह अभियुक्तों के खिलाफ थाना गौतमपल्ली में सामूहिक दुष्कर्म, जानमाल की धमकी व पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता की अर्जी पर दिया था। पीड़िता ने गायत्री प्रजापति व उनके साथियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए अपनी नाबालिग बेटी के साथ भी दुष्कर्म का आरोप लगाया था।पीड़िता ने आरोप लगाया था कि साल 2014 में गायत्री के आवास पर उसके साथ गैंगरेप हुआ था। गायत्री प्रसाद प्रजापत‍ि गैंगरेप के मामले में 15 मार्च 2017 से जेल में बंद हैं। गायत्री समेत सभी अभियुक्तों को मार्च 2017 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

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इस मामलें में कोर्ट ने उनके अलावा दो अन्य अभियुक्त आशीष शुक्ला व अशोक तिवारी को भी दोषी करार दिया है। गायत्री के गनर रहे चंद्रपाल, पीआरओ रूपेश्वर उर्फ रूपेश व एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के बेटे विकास वर्मा तथा अमरेंद्र सिह उर्फ पिटू के खिलाफ कोर्ट ने साक्ष्य नहीं पाया और उन्हें बरी कर दिया गया। बुधवार को अदालत के समक्ष गायत्री समेत सभी अभियुक्त जेल से आकर उपस्थित थे। विशेष जज ने गायत्री समेत तीनों अभियुक्तों को आइपीसी की धारा 376 डी व पाक्सो एक्ट की धारा 5जी/6 के तहत दोषी पाया। IPC की धारा के तहत उम्र कैद, जबकि पाक्सो की धारा के तहत मृत्युदंड की सजा का भी प्रविधान है। सजा के बिंदु पर 12 नवंबर को सुनवाई होगी।पूर्व मंत्री सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी करार, 12 नवंबर को होगी सजा पर सुनवाई