कर्मचारियों-पेंशनरों को मिलेगा बड़ा तोहफा! डीए में 4% वृद्धि जल्द, एरियर-बोनस का भी लाभ, सीएम के पास पहुंची फाइल

7th pay commission da hike

Uttarakhand Employees DA Hike/Bonus  : उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए खुशखबरी है।  महंगाई भत्ता वृद्धि और दिवाली बोनस पर ताजा अपडेट सामने आया है।खबर है कि सरकारी कर्मचारियों के डीए वृद्धि और बोनस की फाइल  सीएम पुष्कर सिंह धामी के पास पहुंच गई है, जिस पर दिवाली से पहले मुहर लग सकती है  और कर्मचारियों को इसी हफ्ते डीए और बोनस का तोहफा मिल सकता है, हालांकि अभी अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

सीएम के पास पहुंची फाइल

दरअसल, केन्द्र सरकार द्वारा केन्द्रीय कर्मचारियों-पेंशनरों का 4% महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने के बाद अब राज्यों में भी डीए के दरों में संशोधन करना शुरू कर दिया है। अबतक हरियाणा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे कई राज्यों ने डीए और बोनस का ऐलान किया जा चुका है और अब उत्तराखंड सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का 4% डीए बढ़ाने और 7000 दिवाली बोनस देने की तैयारी है, इसके लिए वित्त विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सीेएम को मंजूरी के लिए भेज दिया है, जिस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।बता दे कि   प्रदेश के 3 लाख से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं और शहरी निकायों के कार्मिकों व पेंशनर के महंगाई भत्ते को 42% से बढ़कर 46% किया जाना है।

डीए बोनस का जल्द मिलेगा लाभ

संभावना है कि केन्द्र की तरह राज्य में भी जुलाई से 4 फीसदी डीए बढ़ाया जा सकता है और कर्मचारियों को जुलाई से अक्टूबर तक का एरियर भी दिया जा सकता है। अगर डीए बढाया जाता है तो दिसंबर में नई दरों के साथ सैलरी बढ़कर आ सकती है।  इसके अलावा दिवाली बोनस पर भी फैसला हो सकता है। इस साल भी राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर बोनस के रूप में 7000 रुपये दिए जाने का प्लान है। 4800 ग्रेड पे तक के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा, इस तरह 1.31 लाख कर्मियों को बोनस का लाभ मिलने की उम्मीद है। वही हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अनौपचारिक रूप से सीएम पुष्कर सिंह धामी को डीए और बोनस पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया था, ऐसे में अब सबकी निगाहें सीएम के फैसले पर टिकी है।

 

 


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Pooja Khodani

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। "कलम भी हूँ और कलमकार भी हूँ। खबरों के छपने का आधार भी हूँ।। मैं इस व्यवस्था की भागीदार भी हूँ। इसे बदलने की एक तलबगार भी हूँ।। दिवानी ही नहीं हूँ, दिमागदार भी हूँ। झूठे पर प्रहार, सच्चे की यार भी हूं।।" (पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर)

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