शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, नहीं होंगे इन कार्यों का हिस्सा, दिशा निर्देश जारी, कार्यशैली में बदलाव, वेतन-अनुदान का जल्द मिलेगा लाभ

Kashish Trivedi
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Employees Teachers Salary : राज्य सरकार ने शिक्षकों-कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। दरअसल उनके कार्यशैली में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके लिए निर्देश भी दिया गया है। शिक्षा मंत्री स्पष्ट करें कि किसी भी अन्य गैर शैक्षणिक कार्य में शिक्षकों की भागीदारी नहीं रहेगी।

बिहार के शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है, बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने विधान परिषद में एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया है कि बिहार के सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षक द्वारा 3 कार्यों को छोड़कर किसी अन्य गैर शैक्षणिक कार्य में भागीदारी नहीं दी जाएगी। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षक दस वर्षीय जनगणना, आपदा में सहायता और विधानमंडल और स्थानीय निकाय के अलावा किसी अन्य में भागीदारी नहीं देगा।

शिक्षा मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग द्वारा कार्य निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में तीन विशेष कार्यों को छोड़कर किसी अन्य कार्य में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी। दरअसल संबंधित गैर सरकारी संकल्प एमएलसी सच्चिदानंद राय द्वारा दी गई थी। जिस पर बिहार सरकार द्वारा फैसला लिया गया है।

वेतन अनुदान मामले पर भी चर्चा संभव

इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों के बकाए और रोके गए वेतन अनुदान मामले पर भी चर्चा की जाएगी। वेतन अनुदान पर बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा। वित्त अनुदानित शिक्षण संस्थानों के बकाए और रोके गए वेतन अनुदान मामले में वरिष्ठ विधान पार्षद मदन मोहन झा और संजीव कुमार सिंह सहित अन्य पार्षद शिक्षा मंत्री के साथ मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही वेतन अनुदान पर निर्णय लिए जाने की तैयारी की गई है।

वेतन अनुदान को शीघ्र जारी किए जाने की मांग

इतना ही नहीं वरिष्ठ विधान पार्षद मदन मोहन झा ने मांग की है कि वित्त अनुदानित इंटर डिग्री कॉलेज और वित्त अनुदानित माध्यमिक विद्यालय के सभी बकाया अनुदान का भुगतान एकमुश्त राशि में किया जाना चाहिए। साथ ही 2014 से 16 तक रोके गए परीक्षा फल आधारित वेतन अनुदान को भी शीघ्र जारी किए जाने की मांग की गई है।

संजीव कुमार सिंह ने कहा कि 5 से 6 वर्षों से वेतन अनुदान लंबित है जबकि शिक्षा मंत्री द्वारा कहा जा रहा है कि संबंधित शिक्षण संस्थानों की स्थाई मान्यता के बाद संबंधित चालू का अनुदान जारी कर दिया जाएगा। वही बैठक के बाद इस पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाना है।


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