हाई कोर्ट का कर्मचारी-डॉक्टर्स के सेवानिवृत्ति आयु पर बड़ा फैसला, रिटायरमेंट उम्र 2 वर्ष बढ़ी, 62 वर्ष तक जारी रखेंगे सेवा, मिलेगा अन्य लाभ

वही याचिकाकर्ता अपनी 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ही सेवा से सेवानिवृत्त होंगे।

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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। हाई कोर्ट (High Court) ने एक बार फिर से अपने कर्मचारियों-आयुष डॉक्टर्स (Employees-Ayush Doctors) को बड़ी राहत दी है। दरअसल सेवानिवृत्ति आयु (Retirement Age) पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि शासकीय कर्मचारी और आयुर्वेदिक डॉक्टर 62 साल की उम्र तक अपनी सेवा जारी रख सकेंगे और उन्हें सेवानिवृत (Retire) नहीं माना जाएगा।

हाईकोर्ट में आयुर्वेद डॉक्टर की तुलना में एलोपैथिक डॉक्टरों (allopathic doctors) के लिए अलग-अलग उम्र की सेवानिवृत्ति को चुनौती देने के लिए रिट याचिका दायर की गई थी। याचिकाओं की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर 62 वर्ष की उम्र पूरी होने तक सेवा में बने रहने के हकदार हैं। रिटायरमेंट उम्र को लेकर जो नियम एलोपैथिक डॉक्टर के लिए लागू है। वही आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए भी लागू होंगे।

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सुनवाई के दौरान राजस्थान हाई कोर्ट में याचिकाओं के संबंध में दलील देते हुए वकील ने कहा कि एलोपैथिक डॉक्टर की सेवानिवृत्ति आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किया गया था। दरअसल 31 मार्च 2016 को सेवानिवृत्ति आयु में यह संशोधन हुए थे। जिसके लिए कुछ एक याचिकाकर्ता अभी भी काम कर रहे हैं जबकि अन्य याचिकाकर्ता अधिसूचना जारी होने के बाद 60 वर्ष की उम्र में ही सेवानिवृत्ति को प्राप्त हो गए।

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जिस पर न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुहा मेहता ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि उन सभी याचिकाकर्ता है जो 31 मार्च 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्हेंं 62 वर्ष तक सेवा में रहने का अधिकार है।हालांकि इसके लिए प्रतिवादी प्राधिकरण को व्यक्तिगत मामले में 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक सेवा में उनके इलाज के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही उन्हें सेवा की निरंतरता के परिणामी लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही उनके पेंशन का पूरा निर्धारण और अन्य लाभ को भी इसमें शामिल किया जाएगा। हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे कर्मचारी जो 60 वर्ष की आयु प्राप्त होते ही सेवानिवृत्त हुए उन्हें 62 वर्ष की आयु तक सेवा में तत्काल बहाल किया जाए।

राजस्थान हाई कोर्ट ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम बनाम डॉ. राम नरेश शर्मा एवं अन्य (LL 2021 SC 346), के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अपनी दलील दी है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आयुष प्रणाली का अभ्यास करने वाले डॉक्टर और एलोपैथिक डॉक्टर के लिए सेवानिवृत्ति की विभिन्न आयु का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जहां तक सेवानिवृत्ति का प्रश्न है तो आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर सहित उनके उपचार तरीके और श्रेणी को लेकर अंतर करने योग्य नहीं होगा।

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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम में दायर अपील पर फैसला करते हुए आयुष डॉक्टर की सेवानिवृत्ति की आयु को बढ़ाने के निर्देश दिए थे। वही अब राजस्थान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की उस दलील पर फैसला देते हुए क्या यह चिकित्सा आयुर्वेद यूनानी और स्वदेशी चिकित्सा पद्धति का उपयोग कर रहे हैं जबकि सीएचएस डॉक्टर एलोपैथी का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उनके बीच अंतर उचित नहीं है और दोनों के लिए सेवानिवृत्ति आयु होनी चाहिए।

वही राजस्थान हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता 2 वर्ष तक अपनी सेवा पूरी कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें अन्य सभी तरह के लाभ उपलब्ध होंगे। वही याचिकाकर्ता अपनी 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ही सेवा से सेवानिवृत्त होंगे।