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लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा: पीएम मोदी ने की शुरुआत, अखिलेश यादव बोले “गाने से ज्यादा निभाना जरूरी”, पूछा- सामाजिक न्याय की क्या स्थिति है

Written by:Shruty Kushwaha
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प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह गीत गुलामी के दौर में भारतीयों के लिए प्रेरणा और संघर्ष का प्रतीक बना तथा स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया। उन्होंने इसे भारतीय गौरव की महान रचना बताया। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने इस चर्चा को लेकर कहा कि वंदे मातरम् को गाने से ज्यादा जीवन में निभाने की जरूरत है। उन्होंने सामाजिक न्याय की मौजूदा स्थिति पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया और पूछा कि संविधान के मूल भाव तथा बराबरी के सिद्धांतों पर सरकार की प्रतिबद्धता व्यवहार में क्यों नहीं दिखती है।
लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा: पीएम मोदी ने की शुरुआत, अखिलेश यादव बोले “गाने से ज्यादा निभाना जरूरी”, पूछा- सामाजिक न्याय की क्या स्थिति है

आज संसद के शीतकालीन सत्र के छठवें दिन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा हो रही है। यह बहस ’वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई है, जिसमें देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से विचार-विमर्श चल रहा है। पीएम मोदी ने इस चर्चा पर प्रारंभिक वक्तव्य दिया।

उधर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस चर्चा को लेकर कि “वंदे मातरम्” को गाने से ज्यादा निभाने की ज़रूरत है। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये देखना होगा कि आज देश में सामाजिक न्याय की क्या स्थिति है। बीजेपी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी पार्टी होने का दावा करने वाली वो दरअसल राष्ट्रविवादी पार्टी है।

लोकसभा में पीएम मोदी ने की ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि गुलामी के दौर में जब भारत के लोगों पर अंग्रेजों का जुल्म हो रहा था उस समय बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने ये गीत लिखा था। उन्होंने कहा कि ये रचना स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गई और वंदे मातरम् हर भारतीय का संकल्प बन गया। पीएम मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा “हमें गर्व होना चाहिए कि दुनिया के इतिहास में ऐसा कोई काव्य नहीं हो सकता।ऐसा कोई भावगीत नहीं हो सकता जो सदियों तक एक लक्ष्य के लिए कोटि-कोटि जनों को प्रेरित करता हो और जीवन आहुत करने के लिए लोग निकल पड़ते हैं।  पूरे विश्व को पता होना चाहिए कि गुलामी के कालखंड में भी ऐसे लोग हमारे यहां पैदा होते थे जो इस प्रकार के भावगीत की रचना कर सकते थे। यह विश्व के लिए अजूबा है।” उन्होंने कहा कि इसके बारे में हमें गर्व से कहना चाहिए तो दुनिया भी मानना शुरु करेगी।

अखिलेश यादव ने किए सवाल

वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद में ‘वंदे मातरम’ पर हो रही चर्चा के औचित्य और आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने राष्ट्रीय गीत को गाने से ज्यादा उसे अपने जीवन में उतारने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा है कि “मुझे नहीं पता भारतीय जनता पार्टी क्या कहना चाहती है। राष्ट्रवादी पार्टी राष्ट्रविवादी पार्टी है। और गाने से ज्यादा निभाना जरूरी है। संविधान में और भी ऐसे फैसले हैं। बाबा साहब ने जो रास्ता दिखाया उस सामाजिक न्याय पर सरकार कहां खड़ी है। गैर बराबरी पर सरकार कहां खड़ी है। आज लोगों को पचास हज़ार की फ्लाइट की टिकट खरीदनी पड़ रही है। ये देश को किस दिशा में ले जा रह हैं। गाने से ज्यादा निभाना जरूरी है। उसका भाव क्या था कि देश स्वतंत्र हो और आजादी के बाद यहां के कानून से काम हो। न्याय मिले लोगों को। आज सामाजिक न्याय कितना मिल रहा है।” उन्होंने कहा कि हमें ये देखना चाहिए कि हम सामाजिक न्याय की दिशा में कितना आगे बढ़े हैं।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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