LOKSABHA ELECTION :कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसानों को क्या-क्या मिला, पढ़िए यहां

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नई दिल्ली।

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा को  ‘जन आवाज’ का नाम दिया है और ‘हम निभाएंगें’ टैग लाइन दी गई है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, पी. चिंदबरम समेत पार्टी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में यह घोषणा-पत्र जारी किया है। विधानसभा की तरह कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में भी किसानों पर फोकस किया है और कई बड़े ऐलान किए है।कांग्रेस ने किसानों के लिए अलग से बजट बनाने की घोषणा की है। कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि विधानसभा में तीन राज्यों में जीत के बाद लोकसभा चुनाव मे भी किसान जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगें।

राहुल गांधी ने इस घोषणा-पत्र को कांग्रेस का बड़ा कदम बताया और कहा है कि जब हमने एक साल पहले इसके लिए प्रक्रिया की शुरुआत की थी तो पी. चिदंबरम और राजीव गौड़ा से कहा था कि यह घोषणा-पत्र देश की जनता की राय होनी चाहिए। इसमें हर वर्ग के लोगों से राय ली गई है।खास करके घोषणा पत्र में किसानों को बड़ी राहत दी गई है।घोषणा पत्र में किसानों के लिए अलग से बजट लाने की बात कही गई है।

राहुल गांधी ने कहा कांग्रेस ने एक अलग ‘किसान बजट’ पेश करने का प्रस्ताव रखा है, साथ ही किसानों द्वारा ऋण की अदाएगी नहीं होने पर इसे फौजदारी मामले की बजाय दीवानी मामला मानने की भी बात कही है। राहुल ने कहा कि हम किसानों के लिए अलग से बजट लाएंगे. जैसे रेल के लिए अलग बजट होता था, वैसे ही किसानों के लिए भी अलग से बजट होगा ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके लिए कितना खर्च हो रहा है। अगर किसान कर्ज ना चुका पाता है तो वह आपराधिक मुकदमा नहीं बल्कि सिविल मुकदमा के तहत आएगा।

राहुल ने बताया कि मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने किसानों के लिए दो बड़ी चीजें सोची हैं। किसानों के लिए सेपरेट बजट होना चाहिए। नीरव मोदी जैसे लोग लोन लेकर भाग जाते हैं, वहीं किसान लोन नहीं चुकाता तो उसे जेल में डाल दिया जाता है। हमने तय किया है कि हम उसे हम आपराधिक मामला ना मानें। राहुल ने बताया कि BJP ने कहा था कि किसान का कर्ज माफ करना संभव नहीं। NYAY योजना उनके लिए संभव नहीं है, मगर कांग्रेस ऐसा करेगी। हमने MP, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कहा था कि किसानों का कर्जा माफ करेंगे, हमने कर दिया। हम पर भरोसा करिए। देश के किसान को मालूम होना चाहिए कि उसको कितना पैसा मिल रहा है, उसकी MSP कितनी बढ़ाई जा रही है। हम मनरेगा में रोजगार के 150 दिन पक्के करना चाहते हैं। हमारे हिसाब से किसानों का एक अलग बजट होना चाहिए। किसानों को मालूम होना चाहिए कि उनके लिए कितना बजट दिया जाएगा और उन्हें कितना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा। 

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