मंत्री गोविंद सिंह राजपूत : कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने केंद्र के प्रयासों का भागीदार बनेगा मध्यप्रदेश

परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने यातायात के साधनों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देगा मध्यप्रदेश, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक में प्रदेश के परिवहन मंत्री ने रखा पक्ष

 डेस्क रिपोर्ट। भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा नीति आयोग के सहयोग से हरित मोबिलिटी को बढ़ावा देने और सीओपी 26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2030 तक 1 बिलियन कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धताओं के पालन में गोवा में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बैठक में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉक्टर महेंद्र नाथ पांडे, केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल सिंह, मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, नीति आयोग के सचिव अभिताभ कांत, केंद्रीय उद्योग सचिव अभय गोयल सहित सभी राज्यों के परिवहन मंत्री, मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और निजी कम्पनियों के अफसर मौजूद रहे।

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कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के लिए यातायात के साधनों में डीजल एवं पेट्रोल के स्थान पर अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विकल्पों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण किया जाना विश्व की चिंता का विषय है। इसलिए देश में अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के उपयोग एवं निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाना एवं योजना को प्रभावी रूप से लागू कर चरणबद्ध रूप से लक्ष्य को प्राप्त करने की आवश्यकता है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हमारे देश ने वैश्विक ईवी.30@30 अभियान का समर्थन करते हुए वर्ष 2030 तक वाहनों की कुल बिक्री में कम से कम 30 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रतिशत प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग होने से जहां एक और पर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी वही ईंधन चलित वाहनों की संख्या में कमी आने से डीजल पेट्रोल की कीमत में गिरावट आने के साथ-साथ भारत की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा जो कच्चे तेल के आयात पर खर्च होती है, उसमें भी बचत होगी। कार्यशाला को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय पर मोटरयान कर एवं पंजीयन शुल्क में छूट दिए जाने के लिए अधिसूचना दिसंबर 2019 में ही जारी कर चुकी है।

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मध्यप्रदेश में विभिन्न वर्गों के 34500 इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्रथम आओ-प्रथम पाओ के आधार पर जीवनकाल कर(लाइफटाइम टैक्स) सिर्फ 1 फीसदी की न्यूनतम दर से लिया जा रहा है। इन वाहनों में ई-रिक्शा, स्कूटर, मोपेड़, इलेक्ट्रिक बस, मोटरसाइकिल और मोटर कार इत्यादि शामिल है। इसके अलावा 52000 इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रीकरण में निर्धारित फीस से शत-प्रतिशत छूट प्रदान की गई है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में नवंबर 2021 तक ई-रिक्शा, स्कूटर, मोपेड, इलेक्ट्रिक बस, मोटर साइकिल, मोटर कार सहित 22290 लीटर वाहन पंजीकृत हुए हैं।

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200 से 300 किमी तक प्रमुख नगरों में चलेगी इलेक्ट्रिक बसें :

कार्यशाला को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के अंदर 200 से 300 किलोमीटर की दूरी के प्रमुख नगरों के मध्य सार्वजनिक परिवहन के साधन के रूप में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन संबंधी योजना बनाने जा रही है। इसके अलावा मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ई-वाहन के उपयोग को सुगम बनाने के उद्देश्य से यात्रा के दौरान ई-वाहन में लगने वाली बैटरी को रिचार्ज करने के लिए पहले चरण में भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर जैसे महानगरों में लगभग 250 ई-व्हीकल्स चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इसके लिए नगरीय निकायों ने आईईआईएल और एनटीपीसी से अनुबंध कर लिया है। चार्जिंग स्टेशनों के स्थानों का चयन और जमीन की उपलब्धता के संबंध में प्रक्रिया जारी है।

चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पेट्रोल पंप मालिकों से भी चर्चा की जा रही है। इसके लिए सरकार उन्हें लायसेंस और तकनीकी सहायता देने पर विचार कर रही है। चार्जिंग स्टेशन पर बैटरी स्वैपिंग की भी सुविधा होगी। अगर वाहन चालकों के पास समय की कमी है तो वह बैटरी अदला-बदली भी कर सकेंगे। यह सुविधा वेंडरों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी और इस की दरें भी वेंडर उचित रूप से खुद तय करेंगे। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों और केंद्र की तरफ से उनके द्वारा की गई विभिन्न पहलुओं और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बल दिया गया। इस कार्यक्रम में हरित मोबिलिटी को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटो उद्योग और बैटरी विनिर्माण परिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने पर जोर दिया गया है।

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बैठक में परिवहन मंत्री ने दिए कई सुझाव :

बैठक में प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने ई-वाहन व्यवस्था के प्रभावी एवं व्यापक क्रियान्वयन के लिए कुछ सुझाव भी दिए। इन सुझावों के अनुसार मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि जनता को अधिक संख्या में वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार को फेम-2 योजना के तहत ई-वाहनों को पर्याप्त सब्सिडी प्रदान करना चाहिए ताकि इनकी कीमत पेट्रोल-डीजल से संचालित होने वाले वाहनों की तुलना में अधिक न होकर उस उनसे प्रतिस्पर्धात्मक हो जाए। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना करना है जिसके बिना आम जनता ई-वाहनों को आसानी से अपनाने में कठिनाई महसूस करती है। इसलिए पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा संचालित पेट्रोल पंपों में से कम से कम 25 फीसदी पेट्रोल पंपों को चिन्हित कर सरकार को वहां पर ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश जारी करने चाहिए। इसके अलावा शिक्षित बेरोजगारों को पट्टे पर जमीन उपलब्ध कराकर तथा ऋण सुविधा देकर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की योजना बनाई जा सकती है, जिससे चार्जिंग अधोसंरचना निर्मित हो तथा रोजगार के साधन भी उपलब्ध हो सके।

मंत्री राजपूत ने सुझाव दिया कि वाहन क्रय करने के लिए ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का ई-वाहन निर्माता कंपनियों के साथ समन्वय करके ई-वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित करने का प्रयास करना चाहिए। ई-वाहनों की बैटरी के निर्माण में उपयोग में आने वाले कच्चे माल तथा एनोड व कैथोड में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की सुगमता से आयात व आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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ई-वाहन क्रय करने वालों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की योजना बनाई जानी चाहिए। देश के प्रमुख आईआईटी संस्थानों को ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए शोध और विकास की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे ई-वाहनों की लागत में कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को भी ई-वाहनों के प्रचलन को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष योजनाएं लागू करना चाहिए। इसके साथ ही निवेशक कंपनियों को दीर्घ कालीन निवेश विकल्पों का प्रस्ताव देने वाली कंपनियों को चयन में प्राथमिकता देनी चाहिए। परिवहन मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि ई-वाहन निर्माण के क्षेत्र में रोजगार उत्पन्न होने की अनेक संभावनाएं है, इसलिए इस क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही ई-वाहनों के निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों की आपूर्ति हेतु लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों की स्थापना की जानी चाहिए।