मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर मुहर, जानिये क्या है NPR

नई दिल्ली|  देश में नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) पर बवाल मचा हुआ है| इस बीच इस बीच मोदी सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को लेकर बड़ा फैसला लिया है| मोदी कैबिनेट ने NPR पर मुहर लगा दी है| नागरिकता को लेकर देश भर में चल रही बहस के बीच सरकार के इस फैसले की भी चर्चा शुरू हो गई है| विपक्षी दल इसके विरोध में भी उतर आए हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार एनपीआर के जरिए ही देशभर में एनआरसी लागू कराने की तैयारी में है।  हालांकि यह एनआरसी से पूरी तरह अलग है। 

मोदी कैबिनेट की यह बैठक मंगलवार को हुई. बैठक में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अपडेट करने के लिए मंजूरी दी गई|  इस काम में आने वाले खर्च का बजट भी जारी किया गया है, रजिस्टर अपडेट करने के लिए सरकार की तरफ से 8500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट अप्रूव किया गया है| 

क्या है NPR

नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। जिसे नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीयन और राष्ट्रीय पहचान) नियम 2003 के प्रावधानों आधार पर स्थानीय (ग्राम/कस्बा/तहसील)/उपजिला/जिला/राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। भारत में रहने वाले प्रत्येक सामान्य नागरिक के लिए नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में पंजीयन कराना अनिवार्य है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में देश के हर नागरिक को अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। इसमें लेखा जोखा होगा कि कोई भी नागरिक किस इलाके में रह रहा है। किसी एक जगह पर छह महीने से रहने वाले शख्स को इस रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। 

NPR और NRC में अंतर् 

 नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और एनआरसी की चर्चा साथ हो रही है, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर् है| एनआरसी के पीछे जहां देश में अवैध तौर पर रहने वाले लोगों की पहचान करना है, वहीं एनपीआर में छह महीने या उससे ज्यादा वक्त तक किसी एक जगह पर रहने वाले व्यक्ति को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। कोई व्यक्ति अगर बाहरी है और वह देश के किसी हिस्से में 6 महीने से ज्यादा वक्त से रह रहा है तो उसे भी NPR में नाम दर्ज कराना अनिवार्य है। NPR का मुख्य मकसद बायोमैट्रिक डेटा तैयार कर असली लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक होगा सर्वे 

एनपीआर को अपडेट करने का काम साल 2021 की जनगणना के लिए अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच होने वाली घरों की सूचीकरण प्रक्रिया के साथ होगा। केंद्र सरकार इस आशय को लेकर एक राजपत्रित अधिसूचना पहले ही प्रकाशित कर चुकी है। ये प्रक्रिया असम को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में होगी। असम को बाहर इसलिए रखा गया है क्योंकि अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए वहां एनआरसी (नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर) की प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है।

तीन चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2020 लेकर से 30 सितंबर 2020 के बीच होगा। जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 के बीच पूरा होगा। तीसरे चरण में 1 मार्च 2021 से 5 मार्च 2021 के बीच संशोधन की प्रक्रिया होगी।