गाय भैंस पालने के लिए लेना होगा अब लाइसेंस, जाने राज्य के शहरी इलाके के नए नियम

नए मानदंडों के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, एक आवेदक को मवेशियों के लिए प्रस्तावित स्थान का विवरण प्रस्तुत करना होगा, स्वच्छता सुनिश्चित करनी होगी और उन्हें रखने से कोई गड़बड़ी नहीं होगी इसका ब्यौरा देना होगा। ₹1,000 वार्षिक लाइसेंस शुल्क के रूप में लिया जाएगा।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। राजस्थान सरकार ने शहरी क्षेत्रों में गायों या भैंसों को घरों में रखने के लिए वार्षिक लाइसेंस और 100 वर्ग गज क्षेत्र अनिवार्य कर दिया है। जानवर भटकते पाए जाने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि किसी को भी बिना लाइसेंस के एक घर में एक से अधिक गाय और एक बछड़ा रखने की अनुमति नहीं होगी। मवेशियों के लिए एक अलग निर्दिष्ट क्षेत्र होना चाहिए। नए मानदंड नगर निगमों और परिषदों के तहत सभी क्षेत्रों में लागू किए जाएंगे।

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नए मानदंडों के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, एक आवेदक को मवेशियों के लिए प्रस्तावित स्थान का विवरण प्रस्तुत करना होगा, स्वच्छता सुनिश्चित करनी होगी और उन्हें रखने से कोई गड़बड़ी नहीं होगी इसका ब्यौरा देना होगा। ₹1,000 वार्षिक लाइसेंस शुल्क के रूप में लिया जाएगा। जनहित में काम करने वाले शैक्षणिक, धार्मिक व अन्य संस्थानों को आधी राशि देनी होगी।

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गाय और बछड़े से अधिक मवेशियों की संख्या होने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि जानवरों को मालिक के नाम और नंबर के साथ टैग करना होगा। सार्वजनिक स्थानों पर बिना परमिट के मवेशियों के चारे की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। अनधिकृत बिक्री पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा। पशुपालन के लिए 170-200 वर्ग फुट का आच्छादित क्षेत्र तथा 200-250 वर्ग फुट का खुला क्षेत्र आवश्यक होगा। पशु मालिक दूध या उसके किसी भी उत्पाद को बेचने जैसी कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला सकता है।

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स्वच्छता के साथ किसी भी तरह का समझौता करने पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रत्येक 10 दिन में नगर निगम क्षेत्र के बाहर गाय के गोबर का निस्तारण करना पशुपालक की जिम्मेदारी होगी। गाय के उपले को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं सुखाया जा सकता। बिना लाइसेंस के चारा बेचने पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा।