PM Modi ने कारगिल में जवानों के साथ मनाई Diwali, बोले – दिवाली का मतलब आतंक के अंत का उत्सव

PM Modi ने कारगिल में जवानों के साथ मनाई Diwali, बोले – दिवाली का मतलब आतंक के अंत का उत्सव

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) हर साल की तरह इस साल भी दिवाली (Diwali) मनाने जवानों के बीच पहुंचे। इस बार वे कारगिल के जवानों के पास पहुंचे (PM Modi celebrated Diwali with soldiers in Kargil )और उनमें अपने सम्बोधन से जोश भर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी आतिशबाजी और हमारे धमाके अलग होते हैं, आपकी आतिशबाजी और आपके धमाके अलग होते हैं। उन्होंने जवानों से कहा कि बिना ताकत के शांति कायम करना मुश्किल है और ये कारगिल (PM Modi in Kargil) की पवित्र धरती इसकी गवाह है कि जब भी दुश्मन ने भारत माता की तरफ आंख उठाकर देखा है कारगिल में तैनात हमारे सैनिकों ने उन्हें धूल ही चटाई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जवानों को दिवाली की परिभाषा अपने तरीके से बताई।  उन्होंने कहा कि दिवाली का मतलब है- आतंक के अंत का उत्सव। यही कारगिल ने भी किया था। कारगिल में हमारी सेना ने आंतक के फन को कुचला था और देश में जीत की ऐसी दिवाली मनी थी कि लोग आज भी याद करते हैं।

पीएम मोदी (PM Modi) ने कहा कि मैं यहाँ के अधिकारियों का आभारी हूँ जिन्होंने 23 साल पुरानी मेरी तस्वीर मुझे दिखाई। मुझे वो पल याद आ गए,  “ये मेरा सौभाग्य था कि मैं उस जीत का साक्षी बना था और मैंने उस युद्ध को करीब से देखा था। देश के एक सामान्य नागरिक के तौर पर मेरा कर्तव्य मुझे जंग के मैदान तक ले आया था। हम जो भी मदद कर सकते थे, वही करने यहां आए थे। हम बस पुण्य कमाने आए थे।”

प्रधानमंत्री ने कवि रामावतार त्यागी की कविता – मन समर्पित, तन समर्पित की कुछ पक्तियां भी सुनाई , जवानों को अपने हाथ से मिठाई भी खिलाई , कहा कि मैं यहाँ  करोड़ों देशवासियों की शुभकामनायें लेकर आया हूँ, मैं प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं आया अपने परिवार में आया हूँ, पीएम ने जवानों के ऑर्केस्ट्रा के साथ “मां तुझे सलाम” गीत भी गुनगुनाया।

Atul Saxena
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Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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