प्रधानमंत्री मोदी की छठ महापर्व की देशवासियों को शुभकामनाएं, कहा “सभी का जीवन अलौकिक रहे यही कामना है”

4 दिन का यह पर्व इस बार 28 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।

देश, डेस्क रिपोर्ट। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने छठ महापर्व (chhath mahaparv) पर देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं दी है। मोदी ने अपने ट्विटर के माध्यम से देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि “सूर्यदेव और प्रकृति की उपासना को समर्पित महापर्व छठ की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान भास्कर की आभा और छठी मइया के आशीर्वाद से हर किसी का जीवन सदैव आलोकित रहे, यही कामना है।” मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी देशवासियों को महापर्व छठ की शुभकामनाएं प्रेषित की। उन्होंने कहा “समस्त देशवासियों को सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। छठी मैया सभी को सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करें।”

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आपको बता दें छठ महापर्व मुख्यतः उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और नेपाल में मनाया जाता है। इस पर्व में सूर्य नारायण और छठ मैया की पूजा की जाती है। महिलाएं व्रत रखकर अपने पुत्रों की लंबी आयु की कामना सूर्य देवता और छठ मैया से करती हैं और अर्घ्य देकर उनकी पूजा करती है। 4 दिन का यह पर्व इस बार 28 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस त्यौहार को सूर्य षष्टि, छठ, महापर्व, डाला पूजा, प्रतिहार और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है।

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आज छठ पूजा का तीसरा दिन है जिसे संध्या अर्ध के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि छठ पूजा करने से भगवान सूर्यनारायण प्रसन्न होते हैं और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाल जिंदगी प्रदान करते हैं। सूरज की किरने जब शरीर पर पड़ती है तब लोगों की हर बीमारी हर रोग दूर हो जाते हैं। इस दिन नदी में स्नान करने से कई औषधीय लाभ मिलते हैं। त्योहार से न केवल लोगों की शारीरिक विकृतियों दूर होती है बल्कि मानसिक शुद्धता भी मिलती है।

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4 दिन के इस महापर्व में लोग अलग-अलग प्रथाओं के अनुसार अलग-अलग पूजा करते हैं। पर्व के पहले दिन को कद्दू भात या नहाई खाई के रूप में जाना जाता है। इसमें महिलाएं व्रत कर दाल और सातवें कद्दू भात बनाती हैं जिसे वह भगवान को अर्पित करती हैं। पर्व के दूसरे दिन को खाराना के रूप में मनाया जाता है जिसमें महिलाएं रोटी और चावल की खीर बना चंद्र देवता को अर्पित करती हैं। तीसरे दिन की पूजा में महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं और शाम होते ही भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसके बाद चौथे और आखिरी दिन जिसे दूसरी अर्ध के रूप में मनाया जाता है महिलाएं उगते सूरज को अर्ध प्रदान करती हैं। इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। इसके बाद महिलाएं अपना 36 घंटे लंबे व्रत को समाप्त करती है।