किसानों के लिए 15 अगस्त को बड़ी घोषणा कर सकते है प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली।

एक बार फिर केन्द्र की मोदी सरकार किसानों को तोहफा देने वाली है। खबर है कि 15 अगस्त को पीएम मोदी किसानों के लिए पेंशन योजना की घोषणा कर सकते है।सुत्रों की माने तो इस स्कीम के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसका लाभ देश के 12-13 करोड़ किसानों को मिलेगा। हालांकि सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं की गई है, लेकिन  मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का दावा किया जा रहा है। बता दे कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ही किसानों के लिए पेंशन योजना का प्रावधान किया गया था। 

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अग��्त को किसान पेंशन स्कीम की शुरुआत करेंगे। कृषि सचिव ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर स्कीम लागू करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने का निर्देश दिया है। इस योजना के तहत एलआईसी किसानों के पेंशन फंड को मैनेज करेगा। इस पेंशन स्कीम के तहत किसानों को 60 साल होने के बाद 3000 रुपये बतौर पेंशन देने का प्रा‌वधान किया गया है।

पहले चरण में मिलेगा 5 करोड़ किसानों का फायदा

सुत्रो के अनुसार, केंद्र की किसान पेंशन योजना का फायदा देश के 12-13 करोड़ किसानों के मिलेगा। खबरों के अनुसार, इस योजना को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा और पहले चरण में संभवतः 5 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा। यह योजना 18 से 40 वर्ष के किसानों के लिए होगी। किसानों के लिए ये स्कीम पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी। इसमें आधा हिस्सा किसान और आधा हिस्सा सरकार वहन करेगी। अगले हफ्ते से इसके लिए रजिस्ट्रेशन की शुरुआत हो सकती है। 

ऐसे मिलेगा लाभ

आपको बता दें कि अगर किसान हर महीने 100 रुपये जमा करता है तो सरकार उसमें हर महीने 100 रुपये जमा करेगी। इस तरह 60 साल की उम्र के बाद उसे 3000 तक की पेंशन मिलेगी। किसान पेंशन योजना पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। बताया जाता है कि बीजेपी ने किसानों को पेंशन देने का वादा करने का आइडिया अपने ही एक राज्य हरियाणा से लिया है।

राज्यों का सहयोग 

वित्त मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के अनुसार इस स्कीम में राज्य सरकारों का पूरा सहयोगा लिया जाएगा। राज्यों को कहा गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ पहुंचाने के लिए सहयोग दें। जहां तक इस स्कीम में वित्त संबंधी तकनीकी बातें हैं, उस बारे में सहमति बन गई है। केंद्र सरकार इसका पूरा जिम्मा लेगी और राज्य सरकारों पर किसी प्रकार का वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। 

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