जेल में कैद एक कैदी को मिला 8 लाख का सालाना पैकेज, जानिए पूरा मामला

जेल के डीजी बताते है कि कैदी के पढ़े लिखे होने के चलते बीते साल वो स्थानीय कोचिंग सेंटर के छात्रों को पढ़ाता था। उसके पढ़ाने का तरीका अच्छा होने के कारण बच्चे भी उससे पढ़ने में रूचि दिखाते थे।

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शिमला, डेस्क रिपोर्ट। जहां कोरोना ने लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है वहीं लोगों की आर्थिक समस्या भी बढ़ा दी है। कोरोना काल के कारण लगे लॉकडाउन के चलते कई लोग आर्थिक रुप से निर्बल हो गए, वहीं बहुत लोगों की जॉब पर असर पड़ा है। इसी बीच शिमला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक कैदी को उसकी काबिलियत के दम पर 8 लाख का सालाना पैकेज बतौर साइंस टीजर के तौर पर मिला है।

दरअसल, हिमाचल की जेल में ये कैदी उम्र कैद की सजा काट रहा है। ये कैदी कक्षा 10वीं- कक्षा 12वीं के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाता है। कैदी की लगन और काबिलियत को देखते हुए ऑनलाइन क्लास मुहैया कराने वाली एक कंपनी ने इस कैदी को बतौर साइंस टीचर 8 लाख के सालाना पकैज पर नौकरी पर रखा है।

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कैदी के हुनर और पॉजिटिव रुख को देखते हुए जेल विभाग अपनी तरफ से हरसंभव सहायता देकर उसे आगे बढ़ने में पूरी सहायता कर रहा है। ये ऐसा पहला मामला है जब किसी कैदी को इतने बड़े पैकेज पर किसी शैक्षणिक संस्था ने नौकरी पर रखा हो। बता दें कि जेल में बंद कैदी ने नेशनल लेवल के तकनीकी संस्थान से अपनी पढ़ाई की है।

क्यों है जेल में केद ?

दरअसल, 2010 में कैदी ने अपनी प्रेमिका के साथ आत्महत्या करने का प्रयास किया था। इस प्रयास के दौरान उसकी प्रमिका की तो मौत हो गई पर ये बच गया। जिसके बाद इसके बच जाने के कारण इस पर लड़की के परिजनों ने हत्या का आरोप लगा दिया। वहीं पुलिस ने हत्या के आरोप में इसे गिरफ्तार कर लिया और बीते 20 साल से ये उम्र कैद की सजा काट रहा है।

वहीं इस पूरे वाक्या पर जेल के डीजी सोमेश गोयल का कहना है कि हर हाथ को काम अभियान के तहत सभी काबिल कैदियों को काम दिलाने का प्रयास शुरु हुआ। इस कैदी के तकनीकी शिक्षित होने के कारण पहले तो जेल विभान ने कार्यों में इससे सेवा ली। साथ ही इस कैदी ने जेल विभाग के लिए भर्ती परीक्षा को लेकर एक सॉफ्टवेयर बनाने में मदद की।

आगे डीजी बताते है कि कैदी के पढ़े लिखे होने के चलते बीते साल वो स्थानीय कोचिंग सेंटर के छात्रों को पढ़ाता था। उसके पढ़ाने का तरीका अच्छा होने के कारण बच्चे भी उससे पढ़ने में रूचि दिखाते थे। जैसे जैसे इसका नाम होने लगा तो हाल ही में देश की एक नामी गिनामी कंपनी ने इसे ऑनलाइन साइंस की क्लान लेने के लिए हायर किया।

आगे डीजी गोयल ने कहा कि किसी भी कारण के सजा काटने वाले कैदियों को आगे बढ़ने में मदद और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना बहुत जरुरी है। ऐसा होने से उद्योगों और कंपनियों को भी हेल्प मिलती है, वहीं इनके जीवन में भी बड़ा और सकारात्मक बदलाव आता हैं।

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