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क्या जेल से बाहर आएंगे सोनम वांगचुक? गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होगी सुनवाई

Written by:Rishabh Namdev
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इस समय जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल में बंद हैं। अब कल उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मामले पर दो जजों की बेंच सुनवाई करेगी। जानिए अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है।
क्या जेल से बाहर आएंगे सोनम वांगचुक? गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 8 दिसंबर को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की याचिका पर सुनवाई होगी। दरअसल सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में उनके पति को अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया है। यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस याचिका में इस कार्रवाई को मनमानी करार दिया गया है। अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी। संभवत: सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति वी. अंजरिया की बेंच द्वारा की जाएगी।

इससे पहले 24 नवंबर को मामले की सुनवाई टाल दी गई थी। केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा था। दरअसल 29 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत द्वारा सोनम वांगचुक की पत्नी की याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा गया था।

याचिका में क्या कहा गया है?

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने अपनी याचिका में मांग की है कि हिरासत का आदेश पुरानी प्राथमिक, स्पष्ट आरोपों और अनुमानों पर आधारित है। इसीलिए हिरासत के कथित आधारों से इसका कोई सीधा या करीबी संबंध नहीं है। कोई भी कानूनी या तथ्यात्मक औचित्य इसमें नहीं है। सीधे तौर पर इस याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया जाना अवैध है और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। अपनी याचिका में गीतांजलि जे. अंगमो ने कहा है कि निरोध शक्तियों का इस तरह मनमाना इस्तेमाल अधिकार का दुरुपयोग है, जो संवैधानिक स्वतंत्रता और सही प्रक्रिया की बुनियाद को चोट पहुंचाता है, और ऐसे आदेश को अदालत द्वारा रद्द किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी दे दें कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस विरोध प्रदर्शन में चार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जबकि 90 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। सरकार द्वारा सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद सोनम वांगचुक को इस मामले में जेल में डाल दिया गया। वहीं अब उनकी पत्नी का कहना है कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। इस घटना के लिए वांगचुक के कामों या बयानों को किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं बताया जा सकता। दरअसल 26 सितंबर को NSA के तहत सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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