अब एसटी आयोग ने बताई ‘बजरंगबली’ की जाति, ठोंका दावा

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लखनऊ। देश में भगवान राम से राजनीति अब भगवान हनुमान पर शिफ्ट हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवान हनुमान को दलित जाति का बताने के बाद अब राजनीति तेज हो गई। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नन्द किशोर साय ने अब भगवान हनुमान पर अपना दावा ठोंका दिया है। उन्होंने कहा कि पवनपुत्र, और केसरीनंदन कहे जाने वाले महावीर बजरंग बली हनुमान दरअसल दलित नहीं, जनजाति के थे। आदिवासियों में कई जनजातियों का वानर गोत्र होता है, इसी आधार पर हनुमान को वानर कहा गया।

इससे पहले उन्होंने यह भी कहा कि कौन जनजाति का है यह निर्णय करने का अंतिम अधिकार भी जनजाति आयोग के पास ही है किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के पास नहीं। प्रेसवार्ता में पहले उन्होंने अपने लखनऊ कार्यक्रम और राष्ट्रीय जनजाति आयोग की लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समीक्षा बैठक के संबंध में बताया उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों और आदिवासियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की मॉनिटरिंग करना और इससे संबंधित समस्याओं के निस्तारण के लिए काम करना आयोग का प्रमुख कार्य है। एसटी आयोग के अध्यक्ष ने पूर्वांचल प्रदेश के कुछ अन्य जनपदों में रहने वाली खरवार जाति को भी जनजाति बताएं उन्होंने कहा कि घर वालों ने राज्य सरकार के दस्तावेजों में कहार कहा जाता है वह पूरी तरह जनजाति हैं और कहार जाति नहीं कार्य के लिए प्रयोग होने वाला शब्द है।

सीएम योगी ने अलवर में दिया था बयान

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान अलवर के मलपुरा में भाजपा उम्मीदवार के लिए रैली में कहा कि भगवान हनुमान दलित थे। उन्होंने कहा कि बजरंग बली हमारी भारतीय परंपरा में ऐसे लोक देवता हैं। जो स्वयं वनवासी हैं, निर्वासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं। सभी भारतीय समुदाय को उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, सबको जोड़ने का कार्य बजरंग बली करते हैं। इसलिए बजरंग बली का संकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब तक राम का काज नहीं होगा। हमारा संकल्प होना चाहिए, जब तक राष्ट्र का कार्य नहीं होना चाहिए। तब तक विश्राम नहीं लेंगे।