राज्य सरकार का बड़ा फैसला, मई से दफ्तरों में लागू होगा ये नया फॉर्मूला, कर्मचारियों-अधिकारियों को मिलेगा लाभ, जानें डिटेल्स

Pooja Khodani
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State Government Employees : पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। बढ़ती गर्मी और बिजली बचाने के लिए पंजाब सरकार मई से नया फॉर्मूला लागू करने का जा रही है। इसके तहत  राज्य की भगवंत मान ने सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के दफ्तर आने की टाइमिंग में बदलाव किया है। इसकी सूचना खुद सीएम मान ने ट्वीटर के माध्यम से दी है। नया आदेश 2 मई से लागू होगा और 15 जुलाई 2023 तक प्रभावी रहेगा। खास बात ये है कि देश में पहली बार ये फॉर्मूला लागू होगा।

2 मई से 15 जुलाई तक  रहेगा लागू

दरअसल, पंजाब में बिजली बचाने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के दफ्तर आने की टाइमिंग में बदलाव करने का फैसला किया है।सीएम भगवंत मान ने बताया कि सरकारी अधिकारियों के लिए काम का समय सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर दो बजे तक होगा। 2 मई से लेकर 15 जुलाई तक कर्मचारियों को इसी नियम का पालन करना होगा। ऑफिस का समय बदलने से बिजली का लोड कम होगा।इधर, सीएम के इस फैसले पर कर्मचारियों ने भी खुशी जताई है।इससे उन्हें परिवार के साथ बिताने के लिए अधिक वक्त मिलेगा।

कर्मचारी खुश, बचेगी बिजली

सीएम मान ने आगे बताया कि गर्मियों के दौरान कार्यालय समय में बदलाव से बिजली की मांग पर भार कम होगा।  गर्मी के दिनों में पीएसपीसीएल ( PSPCL) पर दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली का लोड बढ़ जाता है।  यदि सरकारी दफ्तर 2 बजे बंद होते हैं तो सभी पंखे, बल्ब, कूलर व AC बंद होने से पीक लोड 300 मेगावॉट से साढ़े 350 मेगावॉट तक कम हो जाएगा। पंजाबी को गर्मी में कृषि और घरेलू बिजली की कोई समस्या नहीं होगी।फिलहाल, राज्य सरकार के कार्यालयों का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक है।

बिजली बोर्ड की सलाह पर लिया फैसला

सीएम ने बताया कि यह फैसला पावर यूटिलिटी पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के सुझाव पर लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि दोपहर 1.30 बजे के बाद पीक लोड (बिजली का) शुरू होता है और अगर सरकारी कार्यालय दोपहर 2 बजे बंद हो जाते हैं, तो यह पीक लोड को 300 से 350 मेगावाट तक कम करने में मदद करेगा। दोपहर 1:30 बजे से शाम 5 बजे तक पीक लोड रहता है। मान ने कहा कि कार्यालय के समय में बदलाव का फैसला आम लोगों और कर्मचारियों से बातचीत के बाद लिया गया है। यह तरीका विदेशों में अपनाया गया था, लेकिन भारत में पहली बार लागू किया जा रहा है।

 


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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। "कलम भी हूँ और कलमकार भी हूँ। खबरों के छपने का आधार भी हूँ।। मैं इस व्यवस्था की भागीदार भी हूँ। इसे बदलने की एक तलबगार भी हूँ।। दिवानी ही नहीं हूँ, दिमागदार भी हूँ। झूठे पर प्रहार, सच्चे की यार भी हूं।।" (पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर)

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