शास्त्र परंपरा की महापरीक्षा में पहली बार उत्तीर्ण हुई महिलाएं, जगद्गुरु शंकराचार्य ने जताई खुशी

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। शास्त्र परंपरा की महापरीक्षा में पहली बार 2 महिलाएं उत्तीर्ण हुई हैं। विदुषी ऋतुजा बालकृष्ण कुलकर्णी और विदुषी कल्याणी तन्मय हर्डीकर ने न्याशास्त्र में सफलता प्राप्त की है। आधुनिक इतिहास में न्यायशास्त्र को समग्र रूप से पढ़ने वाली तथा महापरीक्षा उत्तीर्ण करने वाली ये पहली महिलाएं हैं। ॠतुजा बाळकृष्ण कुलकर्णी परभणी-महाराष्ट्र निवासी हैं और उन्होने श्रीविद्या पाठशाला, रिवण गोवा में न्यायशास्त्र का संपूर्ण अध्ययन 6 साल में पूर्ण किया। वहीं कल्याणी तन्मय हर्डीकर, माशेल-गोवा निवासी ने वाग्वर्द्धिनी पाठशाला, काणकोण के पण्डित दत्तभार्गव टेंग्सेजी के पास समग्र न्यायशास्त्र का अध्ययन किया है। इनके साथ इस बार विद्वान् सुब्रह्मण्य मंजुनाथ होळ्ळा तथा विद्वान् प्रियव्रत देवदत्त पाटील भी महापरीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं।

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महापरीक्षा के बाद छात्रों के परिश्रम को देखकर जगद्गुरु शंकराचार्य जी ने संतोष व्यक्त किया। प्रथम परीक्षा देने का अवसर प्राप्त महिलाओं का भी उन्होने अभिनंदन किया। परीक्षा आयोजन करनेवाली संस्था दत्त देवस्थान के प्रधान विश्वस्त  संजय क्षीरसागर परीक्षा के दौरान श्रृंगेरी में उपस्थित रहे। संस्था के संस्थापक गुरुदेव क्षीरसागर महाराज के जन्मदिन के अवसर पर अगले फरवरी माह में इन छात्रों को विधिवत् स्नातकपत्र देकर सम्मानित किया जायेगा।

परीक्षा का आयोजन दत्त देवस्थान अहमदनगर द्वारा संचालित वेदशास्त्रपरिरक्षण परिषद् द्वारा किया जाता है। साल 2013 से इस परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है और ये हर 6 माह में आयोजित होती है। न्याय, वेदान्त, व्याकरण, मीमांसा तथा गणित इन विषयों में छात्र-छात्राएं परीक्षा देते है। हर एक विषय में ऐसी 14 षाण्मासिक परीक्षाएं देनी होती है। इसमें लेखन तथा मौखिक दोनों प्रकार की परीक्षा होती है। योग्यता के अनुसार अलग-अलग स्तर पर न्याय में 19 ग्रंथ, व्याकरण में 8, मीमांसा में 9, वेदांत में 12 तथा गणित में 13 ग्रंथों का गुरु परम्परा से अध्ययन होता है। एक छात्र पूर्णकाल पढ़कर एक या दो विषयों को पढ़ सकता है। इन 14 षाण्मासिक परीक्षाओं में उत्तीर्ण होनेवाले छात्रों की अंतिम परीक्षा शृंगेरी के जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा ली जाती है। इसीलिए इसे महापरीक्षा कहा जाता है। यह महापरीक्षा मौखिक होती है। इस बार 16-17 अगस्त 2022 को महापरीक्षा शृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारतीजी के सान्निध्य में सम्पन्न हुई।