SCO की ताकत जानकर रह जाएंगे दंग, जानिए इसमें क्या है भारत की भूमिका

सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्रपति समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम SCO की ताकत के बारे में बताएंगे

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंचे है। जहां वो एशिया समिट (SCO) में हिस्सा लें रहे है। जिसके बाद रूस और चीन समेत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपतियों से मुलाकात भी करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री शंघाई सहयोग संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्षों की 22वीं बैठक में हिस्सा लेंगे और सम्मेलन में भाग लेने वाले राष्ट्रपति समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय बैठक करेंगे। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम SCO की ताकत के बारे में बताएंगे।

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सबसे पहले सभी के मन में एक प्रश्न यह उठता है कि, आखिर SCO क्या है। तो बता दें कि साल 1996 में एक बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें मुख्य रुप से पांच देशों ने हिस्सा लिया था जोकि चीन, रूस, कजाकस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान जैसे देशों का नाम शामिल है। इस बैठक के दौरान धार्मिक तनाव को दूर करने के लिए आपसी सहयोग के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई थी। तब इस बैठक को ‘शंघाई फाइव’ नाम दिया गया। बता दें कि इस संघ का मुख्य उद्देश्य चीन और रुस की सीमाओं पर तनाव को रोकना और सीमाओं में सुधार लाना था।

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फिर धीरे-धारे इस संगठन का विस्तार किया जाने लगा और आखिर में 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना की गई। जिसमें फिलहाल 8 देश शामिल है और साल 2017 में SCO की 17वीं सम्मेलन में संगठन के विस्तार के तहत भारत और पाकिस्तान को पूर्णकालिक सदस्य का दर्जा मिला। केवल इतना ही नहीं इस संगठन को पूरी दुनिया का सबसे ताकतवर संगठन माना जाता है। जिसमें चीन के बाद भारत सबसे बड़े देश के तौर पर शामिल है। बता दें कि इस संगठन में यूरोप और एशिया का 60 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्रफल में इन देशों की आबादी रहती है। केवल इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य जो कि चीन और रूस है। जिनमें 4 परमाणु शक्तियां शामिल है।

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वहीं, कोरोना काल के दौरान पूरे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई थी। जिसके कारण महंगाई, बेरोजगारी के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी जारी है। इस दौरान इसकी बैठक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई थी। जिससे पहले साल 2019 में किर्गिस्तान में की गई थी। वहीं इस बार के बैठक में सामयिक, क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों समेत अर्थव्यवस्था पर चर्चा की जा रही है। साथ ही उन मुद्दों पर बातचीत कर उसके निराकरण करने की रणनीति पर भी चर्चा की जा रही है। जोकि भारत समेत सभी देशों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

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