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Sun, Dec 7, 2025

350 करोड़ की टेक्सटाइल फैक्ट्री पर हिंसक हमले को लेकर बोले राजेश जैन “अफवाहों के कारण हुई घटना, प्रोजेक्ट को लेकर MP Breaking News से की विस्तृत चर्चा

Written by:Ankita Chourdia
नीमच के मोरवन में प्रस्तावित सुविधा रेयॉन्स फैक्ट्री के बाहर हिंसक प्रदर्शन हुआ, जिसमें 50 लाख के नुकसान का अनुमान है। कंपनी मालिक राजेश जैन ने इसे अफवाहों पर आधारित बताया और कहा कि ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने साफ किया कि प्रोजेक्ट जारी रहेगा।
350 करोड़ की टेक्सटाइल फैक्ट्री पर हिंसक हमले को लेकर बोले राजेश जैन “अफवाहों के कारण हुई घटना, प्रोजेक्ट को लेकर MP Breaking News से की विस्तृत चर्चा

नीमच: जिले के मोरवन में प्रस्तावित 350 करोड़ रुपये की सुविधा रेयॉन्स टेक्सटाइल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विरोध गुरुवार को हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने फैक्ट्री परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इस घटना में कंपनी को करीब 40 से 50 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। कंपनी के मालिक राजेश जैन ने इस घटना को स्तब्ध करने वाला बताते हुए कहा है कि यह पूरा आंदोलन गलत सूचनाओं और अफवाहों पर आधारित है। इस मामले को लेकर फैक्टरी मालिक जैन ने MP Breaking News संवाददाता कमलेश सारडा से विशेष बातचीत की।

बातचीत के दौरान क्या कहा जैन ने

जैन ने बताया कि गुरुवार को हुई हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री में काम कर रहे इंजीनियरों और मजदूरों को निशाना बनाया। गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और कई मशीनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जैन ने कहा कि, पिछले कुछ दिनों से कर्मचारियों को काम बंद करने की धमकियां मिल रही थीं, लेकिन आज की घटना ने सारी हदें पार कर दीं।

‘एक बूंद भी गंदा पानी बाहर नहीं जाएगा’

फैक्ट्री मालिक ने कहा, ग्रामीणों और किसानों की सबसे बड़ी चिंता फैक्ट्री से निकलने वाले रसायनिक पानी से मोरवन डैम के दूषित होने को लेकर है, उनका मानना है कि इससे सिंचाई और पेयजल पर गंभीर असर पड़ेगा, पर ऐसा नहीं है। राजेश जैन ने कहा कि फैक्ट्री में अत्याधुनिक ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह बिल्कुल गलत है। हमारी फैक्ट्री में ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक लगाई गई है। इसमें 95% पानी पुनः उपयोग होता है और एक बूँद भी गंदा पानी बाहर नहीं जाएगा। बचा हुआ गाढ़ा अपशिष्ट सीमेंट फैक्ट्री को भेजा जाएगा। – राजेश जैन, मालिक, सुविधा रेयॉन्स

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तकनीक से न तो डैम का पानी दूषित होगा, न पेयजल प्रभावित होगा और न ही किसानों की फसलों को कोई नुकसान पहुंचेगा। जैन ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सभी आवश्यक अनुमतियां मिलने के बाद ही फैक्ट्री का संचालन शुरू होगा। बोर्ड की संतुष्टि के बिना ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ जारी नहीं किया जाएगा।

‘विरोध के पीछे राजनीतिक स्वार्थ’

राजेश जैन ने इस पूरे विरोध को कुछ लोगों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को गुमराह करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कुछ लोग ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं। गलत अफवाहें फैलाकर शांतिप्रिय ग्रामीणों को भड़काया जा रहा है।”

कंपनी के अनुसार, पानी की खपत को लेकर भी गलत जानकारी फैलाई जा रही है। फैक्ट्री को पूरे साल में डैम के कुल पानी का मात्र 0.25% हिस्सा ही चाहिए होगा, वह भी पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी होने के बाद। जैन ने कहा, “डैम पर पहला हक़ जनता का है।”

अगले 20 साल नहीं आएगा कोई उद्योगपति

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर यह उद्योग यहां से चला गया तो अगले 10-20 साल तक कोई दूसरा उद्योगपति इस क्षेत्र में आने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी पहले भी ग्राम सभा और सेमिनार के जरिए ग्रामीणों को तकनीकी जानकारी दे चुकी है, लेकिन कुछ लोगों ने उन बैठकों को भी बाधित करने की कोशिश की थी।

आगे क्या?

हिंसक घटना के बाद कंपनी ने काम जारी रखने का फैसला किया है। राजेश जैन ने कहा, “हम रुकने वाले नहीं हैं। गांव के अधिकांश लोग रोजगार चाहते हैं।” उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा और अन्य शहरों में काम कर रहे कई युवा वापस लौटकर यहां काम करना चाहते हैं। कंपनी अब सुरक्षित माहौल में काम सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा की मांग करेगी। एक तरफ कंपनी विकास और रोजगार का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों की पर्यावरण से जुड़ी आशंकाएं जस की तस हैं। ऐसे में विकास और विरोध के बीच का यह टकराव भविष्य में क्या मोड़ लेगा, यह देखना अहम होगा।

देखें संवाददाता कमलेश सारडा और फैक्टरी मालिक राजेश जैन की बातचीत का पूरा वीडियो