रीवा की आशा कार्यकर्ता रंजना द्विवेदी दुनिया की 19 प्रभावशाली महिलाओं में शुमार

रंजना भारत की एकमात्र महिला है जिन्हें 19 प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया गया है, साथ ही वो इस सूची में पहली तीन प्रभावशाली महिलाओं में शुमार है।

रीवा,डेस्क रिपोर्ट। लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और अगर कोशिश एक स्त्री कर रही हो तो उसके विफल होने के चांस बहुत ही कम हो जाते हैं। एक ऐसा ही मामला रीवा (Rewa) जिले से आया है, जहां पर गुरगुदा गांव (Gurguda Village) की रंजना द्विवेदी (Ranjana Dwivedi) ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसकी प्रशंसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया (World wide) में हो रही है। रंजना एक आशा कार्यकर्ता (Asha Worker) है जिनको अंतर्राष्ट्रीय संस्था (International Organization) एनपीआर डॉट ओआरजी (NPR.ORG) ने 19 प्रभावशाली महिलाओं (19 Influential women) में शामिल किया है, खास बात यह है कि रंजना भारत की एकमात्र महिला है जिन्हें 19 प्रभावशाली महिलाओं में शामिल किया गया है, साथ ही वो इस सूची में पहली तीन प्रभावशाली महिलाओं में शुमार है।

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रीवा जिले की आशा कार्यकर्ता रंजना उस वक्त एक वॉरियर (Worrier) बनकर सामने आई जब हर कोई अपने घर में कैद हो चुका था यानी कि कोरोना काल (Corona Period) के चलते लॉकडाउन के टाइम, जब सबको घर में रहने की हिदायत दी जा रही थी। वहीं कोरोना वॉरियर्स (Corona Warriors) के तौर पर काम कर रही रंजना द्विवेदी (Ranjana Dwivedi) कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक कर रही थी। रंजना दिवेदी (Ranjana Dwivedi) का लोगों को जागरूक करने का अंदाज बहुत ही अलग था। रंजना द्विवेदी (Ranjana Dwivedi) पोस्टर के माध्यम से लोगों को कोरोना वायरस से जुड़े खतरे और उनसे बचाव के बारे में बताती थी।

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रंजना (Ranjana Dwivedi) अपने पोस्टर सोशल मीडिया (Social Media) पर भी साझा करती थी। सोशल मीडिया के माध्यम से ही रंजना (Ranjana Dwivedi) के पोस्टर वाशिंगटन (Washington) की अंतर्राष्ट्रीय संस्था एनपीआर डॉट ओआरजी की नजर में आए, जिसके बाद संस्था ने उन्हें विश्व की 19 प्रभावशाली महिलाओं में शुमार कर लिया। बता दें कि इस महीने एनपीआर ने उनके तीन इंटरव्यू (three interviews) प्रकाशित किए हैं जिसके बाद रंजना को हर कोई बधाई देने में जुट गया है।

बता दें कि एक टाइम ऐसा भी था जब रीवा से करीब 95 किलोमीटर दूर गुरगुदा गांव की महिलाएं आशा कार्यकर्ता रंजना द्विवेदी के आने की जानकारी मिलते ही छिप जाती थी, कुछ महिलाएं तो घर में होने के बावजूद भी बाहर जाने का बहाना बना देती थी, लेकिन रंजना ने कभी हार नहीं मानी। रंजना कहती हैं कि गांव की महिलाओं को टीकाकरण के साथ बाकी बीमारियों के बारे में बताना और समझाना काफी मुश्किल होता था, लेकिन अब वो समय आ गया है जब गांव की महिलाएं मेरा इंतजार करती है।

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रंजना द्विवेदी (Ranjana Dwivedi) बताती है कि साल 2011 में उन्होंने आशा कार्यकर्ता के तौर पर काम शुरू किया था, उन्हें नौकरी (job) करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन गांव के लोगों की समस्या (problem of villagers) को देखते हुए उन्होंने आशा कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू किया। जो महिलाएं पहले उनके नाम से छुप जाती थी, वहीं महिलाएं आज उन्हें अपना आदर्श मानने लगी है। खास बात तो यह है कि एक महिला ने आशा कार्यकर्ता रंजना द्विवेदी से प्रभावित होकर अपने बच्चे का नाम ही रंजना रख दिया है।

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