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ACB का बड़ा एक्शन, 50,000 रुपये की रिश्वत लेते मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल गिरफ्तार, इसलिए मांगी घूस

Written by:Atul Saxena
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आवेदक ठेकेदार ने शिकायत में बताया कि वो कॉलेज हॉस्टल की मेस का ठेकेदार है उसका बिल पास करने और ठेके को जारी रखने के बदले प्रिंसिपल श्रवण मीणा उससे 50 हजार रुपये की डिमांड कर रहे हैं। 
ACB का बड़ा एक्शन, 50,000 रुपये की रिश्वत लेते मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल गिरफ्तार, इसलिए मांगी घूस

भ्रष्टाचारियों के खिलाफ राजस्थान ACB लगातार एक्शन में है, शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम सरकारी विभागों के घूसखोरकर्मियों पर शिकंजा कस रही है, ताजा मामला राजधानी जयपुर का है जहां एसीबी की टीम ने  सिरोही के एक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को 50000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक एसीबी जयपुर की टीम ने भीमराव अंबेडकर शासकीय मेडिकल कॉलेज सिरोही के प्रिंसिपल को जयपुर स्थित उनके आवास के पास से गिरफ्तार किया है, प्रिंसिपल श्रवण मीणा को एक ठेकेदार से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया है।

50000 रुपये रिश्वत की डिमांड

जानकारी के अनुसार जयपुर एसीबी की टीम को एक शिकायत मिली थी जिसमें आवेदक ने भीमराव अंबेडकर शासकीय मेडिकल कॉलेज सिरोही के प्रिंसिपल श्रवण मीणा पर 50,000 रुपये रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे, शिकायतकर्ता ने खुद को ठेकेदार बताया।

हॉस्टल की मेस का बिल पास करने मांगी रिश्वत 

आवेदक ठेकेदार ने शिकायत में बताया कि वो कॉलेज हॉस्टल की मेस का ठेकेदार है उसका बिल पास करने और ठेके को जारी रखने के बदले प्रिंसिपल श्रवण मीणा उससे 50 हजार रुपये की डिमांड कर रहे हैं।  शिकायत के बाद एसीबी ने सत्यापन करवाया तो आरोप सही निकला।

रिश्वत हाथ में आते ही ACB ने दबोचा 

सत्यापन के दौरान प्रिंसिपल मीणा ने ठेकेदार को राजा पार्क क्षेत्र में रिश्वत की राशि के साथ बुलाया, जानकारी मिलने पर एसीबी ने ट्रेप प्लान की और ठेकेदार को 50,000 रुपये देकर भेजा, जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की राशि प्रिंसिपल को दी एसीबी की टीम ने दबिश देकर उसे पकड़ लिया, गिरफ़्तारी के बाद एसीबी ने प्रिंसिपल के आवास और ऑफिस की भी तलाशी ली।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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