Hanuman Mandir: क्या आप जानते है किस मंदिर में पुत्र मकरध्वज के साथ विराजे हैं हनुमान? जानिए इस मंदिर के पीछे की कहानी

Hanuman Mandir: आपने देश के कई प्रसिद्द हनुमान मंदिरों के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या आप उत्तर प्रदेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में जानते है जहां भगवान बजरंगबली अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। यदि आप नहीं जानते है तो आज इस खबर में हम आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देने वाले है।

Rishabh Namdev
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Hanuman Temple: हमारे देश में ही नहीं विदेश में भी भगवान बजरंगबली के बहुत मंदिर है। दरअसल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान बजरंगबली को चिरंजीवी माना जाता है यानी ऐसा माना जाता है कि कलयुग में भगवान बजरंगबली जीवित है। वहीं ऐसा माना जाता है कि भगवान बजरंगबली आज भी इस धरती पर रहते हैं। वहीं इसी कड़ी में आज हम आपको भगवान बजरंगबली के एक ऐसे प्रसिद्द मंदिर के बारे में बताएंगे जहां पर भगवान बजरंगबली अकेले विराजमान नहीं है बलकी वह अपने पुत्र के साथ विराजित हैं।

जानकारी दे दें की यह मंदिर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में स्थित है। भगवान बजरंगबली का यह मंदिर लखनऊ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। दरअसल यह मंदिर लखनऊ के चौक इलाके में बड़ी काली जी मंदिर के प्रांगण में स्थित है। जानकारी के अनुसार बड़ी काली जी मंदिर के प्रांगण में यह मंदिर में हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज के साथ विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में भक्तों द्वारा जब मकरध्वज और हनुमान जी के सामने बैठकर पूजा-अर्चना की जाती है तो उनकी सभी इच्छा पूर्ण होती है। जानकारी के अनुसार इस मंदिर में भगवान हनुमान जी के पास ही उनके पुत्र मकरध्वज की मूर्ति भी विराजित है।

जानिए मकरध्वज की क्या है कहानी?

दरअसल वैसे तो हनुमान जी ब्रह्मचारी थे। जिसके चलते उनका विवाह नहीं हुआ था। मगर हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज के होने के पीछे एक मान्यता है। दरअसल ऐसा माना जाता है कि एक बार जब भगवान बजरंगबलि समुद्र में स्नान कर रहे थे तो उस समय एक मादा मगरमच्छ द्वारा हनुमान जी की पसीना पी लेने से उसका गर्भ ठहर गया। जिसके चलते उसने एक संतान को जन्म दिया था। वहीं हनुमान जी का पुत्र मकरध्वज माना जाता है।

जानिए कैसे हुई मकरध्वज की मूर्ति की स्थापना?

वहीं इस मंदिर के महंत की माने तो, ‘इस मंदिर में जो साधु संत साधना करते थे उन्हें एक सपना आया था। जिसमें उन्होंने देखा कि भगवान हनुमान जी यह चाहते हैं उनकी और उनके पुत्र की मूर्तियां इस जगह पर स्थापित की जाएं। जिसके बाद यहां पर दोनों की मूर्तियों स्थापित की गई।


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मैंने श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय इंदौर से जनसंचार एवं पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। मैं पत्रकारिता में आने वाले समय में अच्छे प्रदर्शन और कार्य अनुभव की आशा कर रहा हूं। मैंने अपने जीवन में काम करते हुए देश के निचले स्तर को गहराई से जाना है। जिसके चलते मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार बनने की इच्छा रखता हूं।

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