Makar Sankranti :मकर संक्रांति पर राशि अनुसार करें दान, जानिए शुभ मुहूर्त, और पूजा विधि

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मकर संक्रांति : हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक मकर सक्रांति का खासा महत्व है|  मकर संक्रांति साल 2019 में 14 जनवरी नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाई जा रही है| जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का संयोग बनता है। इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इनके उत्तरायण होने से पृथ्वी के जीवों को सूर्य की भरपूर कृपा मिलनी शुरू हो जाती है।  इसी दिन से खरमास समाप्त हो जाएंगे और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी|  खरमास में मांगलिक कार्यों की मनाही होती है, जिसके कारन शादी विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किये जाते| मकर संक्रांति से शादी और पूजा-पाठ जैसे कामों का शुभ मुहूर्त शुरू हो जाता है| इस बाद प्रयागराज में कुंभ भी मकर संक्रांति पर शुरू हो रहा है| इसी संक्रांति के दिन ही कुंभ मेले में भक्त त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं|  इस त्योहार को अलग-अलग शहरों और राज्यों में अलग-अलग नाम और परंपराओं के साथ मनाया जाता है|  इस पर्व पर स्नान और दान का खास महत्व होता है| 

तिल-गुड़ का विशेष महत्त्व 

सूर्य के राशि बदलने के कारण इस पर्व का ज्योतिष में भी काफी अधिक महत्व बताया गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर्मों के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इससे कुंडली में सूर्य दोष शांत होते हैं। साथ ही, ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इस दिन सूर्य की किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद रहती हैं। त्वचा की चमक बढ़ती है और शरीर को ऊर्जा मिलती है। सूर्य की किरणों के चमत्कारी असर को देखते हुए ही इस दिन पतंग उड़ाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। मकर संक्रांति पर कुछ देर धूप में बैठना चाहिए। सर्दी के दिनों में समय-समय पर तिल और गुड़ का सेवन करना चाहिए। तिल और गुड़ की तासीर गर्म होती है जो कि हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करती है। तिल-गुड़ की इसी विशेषता को ध्यान में रखते हुए मकर संक्रांति पर इनका सेवन किया जाता है। संक्रांति के समय तिल-गुड़ के सेवन से मौसमी बीमारियों से रक्षा हो सकती है। संक्रांति पर तिल खाने और तिल का दान करने का विशेष महत्व है। तिल के दान से कुंडली के कई दोष दूर होते हैं। विशेष रूप से कालसर्प योग, शनि की साढ़ेसाती और ढय्या, राहु-केतु के दोष दूर करने के लिए तिल का दान किया जाता है।

दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति से एक माह तक सूर्य मकर में रहेंगे। मकर सक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। राशि अनुरूप दान करने से कष्टों का नाश होता है।  मेष राशि के जातक गरीबों में अन्न और वस्त्र का दान करें। वहीं, वृष राशि के जातक किसी गरीब अंधे व्यक्ति को अन्न दान करें। सुगंधित इत्र का दान करें। मकर सक्रांति में गुरु वृश्चिक राशि में ही हैं। शनि धनु में गोचर कर रहे हैं। राहु कर्क में तथा केतु मकर में हैं। सूर्य तथा शनि एक साथ एक माह मकर राशि में रहेंगे। इस प्रकार सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में एक माह तक विराजमान रहेंगे।

राशियों के मुताबिक करें दान 

मिथुन राशि के जातक वस्त्र का दान करें। गाय को पालक खिलाएं। कर्क राशिवालें चावल और चीनी का दान करें।गाय को आटा खिलाएं। सिंह राशि के जातक गेहूं और गुड़ का दान करें। कन्या राशि के जातक मूंग का दान करें। तुला राशि के जातक इत्र और सुगंधित अगरबत्ती मंदिर में दान करें। वृश्चिक राशि के जातक ताम्र पात्र का दान करें। धनु राशि के जातक पीला वस्त्र दान करें। धनु राशि के जातक पीला वस्त्र दान करें। मकर राशि वाले तिल ,तेल का दान आवश्यक है। कुंभ राशि के जातक तिल का दान करें। मीन राशि के जातक चने की दाल का दान करें। 

मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त 

पुण्य काल मुहूर्त – 07:14 से 12:36 तक (कुल समय – 5 घंटे 21 मिनट)

महापुण्य काल मुहूर्त – 07:14 से 09:01 तक (कुल समय – 1 घंटे 47 मिनट)


मकर संक्रांति की पूजा व‍िध‍ि  

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है या फिर घर पर भी सुबह नहाकर पूजा की जाती है| इस दिन भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की जाती है. इसी के साथ मकर संक्रांति के दिन पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण दिया जाता है|