मार्गशीर्ष (Margshirsh Month) के महीने को भगवान कृष्ण का प्रिय महीना कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक श्री कृष्ण ने भगवद गीता में खुद इस बात का उल्लेख किया है कि यह उनका सबसे प्रिय महीना है। ऐसा कहते हैं कि सतयुग में देवों ने इसी महीने से नया साल शुरू किया था। इस समय कन्हैया की पूजन करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
इस हिंदू महीने में भगवान श्री कृष्ण के साथ शंख और तुलसी की पूजन करना भी खास माना गया है। अगर आप श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और यह चाहते हैं कि आपके जीवन में हमेशा सुख समृद्धि और सौभाग्य बना रहे। तो हम आपको पूजन विधि और उपाय की जानकारी देते हैं।
मार्गशीर्ष में कैसे करें पूजन (Margshirsh Month)
इस महीने में भगवान श्री कृष्ण के साथ तुलसी और शंख की पूजन करना शुभ माना गया है। यह भी कहते हैं कि अगहन के महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की गरुड़ की पीठ पर बैठी हुई मुद्रा की पूजन करना बहुत शुभ होता है। इसे शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है और घर में खुशहाली आती है।
कैसे करें पूजन
- सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अब आपको एक चौकी पर भगवान कृष्ण और शंख रखना चाहिए।
- अब कुमकुम, रोली, चंदन भगवान को अर्पित करें।
- जो शंख आपने लिया है उसमें चंदन रखें और हर रोज भगवान को अर्पित करें।
- अब आपको घी का दीपक जलाकर भगवान कृष्ण की आरती करनी होगी।
इन उपायों का रखें ध्यान
- भगवान कृष्ण विष्णु की पूजन में आंवला और तुलसी दल का विशेष महत्व माना गया है। जब भी पूजन करें यह दोनों चीज है जरूर अर्पित करें।
- इसी के साथ बेला, कनेर, वैजयंती, चमेली, जूही, विजया जैसे फूल भगवान की पूजन में जरूर अर्पित करें। यह पुष्प उन्हें बहुत पसंद है और इससे वह प्रसन्न होते हैं।
- इस महीने में पूजन के दौरान तुलसी की मंजरी अर्पित करना बिल्कुल नहीं भूलें। इसे मोक्ष की प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
पूजा के समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। भगवान कृष्ण को अन्य चीजों के अलावा तुलसी के पत्ते बहुत प्रिय हैं। आप जो पत्ते चढ़ा रहे हैं वह कटे-फटे नहीं होने चाहिए और उनके साथ मंजरी जरूर रहनी चाहिए। ऐसी तुलसी भगवान विष्णु को लक्ष्मी जी की तरह प्रिय है। पूजा के समय घी के दीपक के अलावा कपूर के दीपक से भी भगवान की आरती जरूर करें। इसी के साथ तीर्थ स्नान जरूर करें, इससे सभी तरह के रोग दुख दूर होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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