प्रेमानंद महाराज ने बताया कैसे कर्मों से इंसान बदल सकता है अपना भाग्य, अपने प्रारब्ध को कर सकता है परास्त, पढ़ें

हमारा भाग्य हमारे अपने कर्मों से ही बनता और बिगड़ता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मनुष्य जो भी शुभ और अशुभ कर्म करता है, वही उसके भविष्य का निर्धारण करता है। लेकिन क्या हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं? महाराज जी ने क्या कहा पढ़ें।

Bhawna Choubey
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प्रेमानंद महाराज जी को कौन नहीं जानता, बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी प्रेमानंद महाराज जी को अच्छी तरह से जानते हैं रोज़ाना महाराज जी की कोई न कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, प्रेमानंद जी महाराज की बातें सुनने और अपने मन की उलझनों को सुलझाने के लिए लोग दूर दूर से उनके पास आते हैं, और अपने मन की व्यथा बताते हैं और महाराज जी से इसका समाधान मानते हैं।

प्रेमानंद महाराज जी लोगों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं, उन्हें वे मंत्र बताते हैं जिससे कि व्यक्ति जीवन भर ख़ुशहाल रह सकें। ज़्यादातर देखा गया है कि लोग अपनी ज़िंदगी में चल रही उलझनों के बारे में ही सवाल करते हैं, इसी के चलते जब एक बार एक व्यक्ति ने प्रवचन में प्रेमानंद जी महाराज से पूछा, महाराज जी व्यक्ति अपने कर्मों से भाग्य को बदल सकता है? उसने यह भी पूछा कि कर्म और भाग्य का व्यक्ति के जीवन में कितना महत्व है, चलिए जानते हैं महाराज जी ने इसका क्या जवाब दिया।

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कैसे कर्मों से इंसान बदल सकता है अपना भाग्य (Premanand maharaj)

कर्मों का गोदाम

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा, पूर्व में जो हमारे द्वारा शुभ और अशुभ कर्म किए गए हैं, वो इकट्ठे हो जाते हैं , अगर गाँव की भाषा में कहा जाए हमारे कर्मों का एक गोदाम होता है, उसमें से कुछ कर्मों को निकालकर शरीर की रचना होती है, कुछ कर्म शुभ होते और कुछ अशुभ हैं। शुभ और अशुभ दोनों व्यक्ति के शरीर में मिश्रित होते हैं, इन कर्मों के द्वारा रचित शरीर से फल की प्राप्ति होती है।

अच्छे कर्म के बावजूद कठिनाइयाँ क्यों?

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भले ही आप शुभ कर्म कर रहे हो, लेकिन आपके पूर्व अशुभ कर्मों का फल आपको वर्तमान में मिल सकता है, यही कारण है कि कई लोगों की यह शिकायत रहती है कि महाराज जी हमारे कर्म तो अच्छे हैं, लेकिन हमें फल की प्राप्ति नहीं होती है। इसके विपरीत अगर आप वर्तमान में अशुभ कर्म कर रहे हैं, लेकिन पूर्व में आपके कर्म अच्छे हैं, तो आप वर्तमान में भी सुखी नज़र आएंगे।

शुभ-अशुभ कर्मों से मुक्ति का मार्ग

प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि हमारा भाग्य सिर्फ़ दो चीज़ों से बना होता है शुभ और अशुभ कर्मों से, इन दोनों के अलावा भाग्य में और कुछ भी नहीं है। जब भगवान कृपा करते हैं तो हमारा सौभाग्य उदय होता है, भाग्य बदलने के लिए भगवान ने हमें कई अवसर दिए हैं, एक मात्र भगवान की शरण में होकर जब उनका भजन शुरू करें , तो जो हमारा शुभ और अशुभ कर्मों का गोदाम है, वह नष्ट हो जाता है, सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान की शरण में रहने और भजन करने से।

जब तक वह नष्ट नहीं होता है तब तक हमारे मन में शुद्धि नहीं आती है, जब हमारे अंदर शुद्ध ज्ञान प्रकट होता है, हमारे मन में सिर्फ़ और सिर्फ़ सकारात्मक विचार आते हैं, मन किसी के बारे में भी बुरा नहीं सोचता, न ही किसी का बुरा करने का विचार आता है, तब समझ लीजिए कि भगवान की शरण में रहने का आपको फ़ायदा मिल रहा है, भगवान का भजन आपके मन को शांत करने में मदद कर रहा है। ऐसा करने से आप आने वाले भाग्य को चमका रहे है, आप अपने आने वाले भाग्य को बलवान बना रहे हैं। जब ऐसा होने लगेगा तो आप अपने आपको इतना हल्का महसूस करेंगे आपका मन इतना हल्का हो जाएगा।

भाग्य बदलने का सही मार्ग

भगवान की शरण में रहने, और भगवान का नाम जपने से आपका भाग्य कैसे बदल जाएगा आपको पता ही नहीं चलेगा, आप दुनिया की मोह माया से दूर रहना पसंद कर लेंगे आपको पता भी नहीं चलेगा। इसी को कहते हैं भाग्य बदलने का अवसर मिलना, और यह आपके गोदाम के शुभ और अशुभ कर्मों से नहीं हुआ है बल्कि भगवान की कृपा से हुआ है क्योंकि आपने अपने आपको भगवान को समर्पित किया, भगवान पर भरोसा किया, और आप भगवान की भक्ति में लीन रहे।

दिखावे से नहीं, समर्पण से बदलता है भाग्य

प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी बताया, की बहुत लोग ऐसे होते हैं जो दिन रात प्रवचन सुनते हैं, भगवान की भक्ति भी करते हैं, फिर भी भी अपने भाग्य को बदलने में सफल नहीं हो पाते हैं, इसका यह कारण हो सकता है कि वे सिर्फ़ दिखाने के लिए यह सब कुछ कर रहे हैं, उनका मन अभी भी बेचैन है, उन्होंने अपने आपको अभी भी भगवान को समर्पित नहीं किया है, अभी भी वे भगवान की भक्ति में होने के बावजूद भी नकारात्मक विचार मन में लाते हैं, अगर आप सच में चाहते हैं कि आपका भाग्य बदल जाए, जितना भी चिंतन आपके मन में सब कुछ डिलीट कर दो, और फिर देखो कि कैसे भाग्य बदल जाता है।

देह अभिमान मिटाकर ही मिलेगी आत्मशांति

महाराज जी ने यह भी कहा कि चिंतन को डिलीट करना कोई आसान बात नहीं है, शास्त्रों की बातें करना तो बहुत आसान होता है, लेकिन उनके बताए गए निर्देशों पर चलना बहुत मुश्किल है, इसके लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि सारा ज्ञान केवल देह अभिमान को मिटाने के लिए हैं। जिसने स्वरूप को प्राप्त करने की चेष्टा की तब ही शास्त्र ज्ञान सफल हो पाएगा, नहीं तो शास्त्र ज्ञान पाकर भी हम सिर्फ़ कूड़ा करकट ही बटोर रहे हैं। पैसा, धन, सामान, प्रणाम, नमस्कार और ख्याति यह सब कूड़ा करकट है, इसी को बटोरने में हर व्यक्ति भाग रहा है। लेकिन क्या ये सब मिलने के बाद भी व्यक्ति सुखी है? नहीं, इसलिए ये सब चीज़ें तो जीवन में कभी न कभी मिल ही जाएगी, जो नहीं मिलेगा वह है आत्मशांति, आत्मज्ञान जो सिर्फ़ और सिर्फ़ भगवान की भक्ति से मिलेगा।

 


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Bhawna Choubey

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इस रंगीन दुनिया में खबरों का अपना अलग ही रंग होता है। यह रंग इतना चमकदार होता है कि सभी की आंखें खोल देता है। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि कलम में बहुत ताकत होती है। इसी ताकत को बरकरार रखने के लिए मैं हर रोज पत्रकारिता के नए-नए पहलुओं को समझती और सीखती हूं। मैंने श्री वैष्णव इंस्टिट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन इंदौर से बीए स्नातक किया है। अपनी रुचि को आगे बढ़ाते हुए, मैं अब DAVV यूनिवर्सिटी में इसी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूं। पत्रकारिता का यह सफर अभी शुरू हुआ है, लेकिन मैं इसमें आगे बढ़ने के लिए उत्सुक हूं।मुझे कंटेंट राइटिंग, कॉपी राइटिंग और वॉइस ओवर का अच्छा ज्ञान है। मुझे मनोरंजन, जीवनशैली और धर्म जैसे विषयों पर लिखना अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। यह समाज को सच दिखाने और लोगों को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। मैं अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करूंगी।

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