Sawan 2022 : इस जगह है विश्व का सबसे बड़ा भोलेनाथ का मंदिर, जानें पौराणिक कथा

Sawan 2022 : सावन का महीना चल रहा है और ऐसे में कई शिवालयों में भक्तों की काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। सावन (Sawan) में महीने में भोलेनाथ की पूजा अर्चना की जाती है।

sawan 2022

Sawan 2022 : सावन का महीना चल रहा है और ऐसे में कई शिवालयों में भक्तों की काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। सावन में महीने में भोलेनाथ की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसे में आज हम आपको विश्व के सबसे बड़े शिवमंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जी हां, विश्व का सबसे बड़ा शिव मंदिर तमिलनाडु के तिरुवनमलाई जिले में स्थित है इस मंदिर को अरुणाचलेश्वर शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है।

यहां सावन के महीने में भक्तों की काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। इतना ही नहीं यहां कार्तिक पूर्णिमा के दिन मेला भी लगता है। आपको बता दे, इस मंदिर में भक्त भोलेनाथ के दर्शन करने के बाद अन्नामलाई पर्वत की परिक्रमा करते है जो की 14 किलोमीटर की है। कहा जाता है यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। ये मंदिर विश्व का सबसे बड़ा मंदिर हैं।

मंदिर से जुड़ी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब एक बार ब्रह्माजी ने हंस का अवतार लिया। उसके बाद वह शिव के शीर्ष को देखने के लिए निकल पड़े। लेकिन वह उसे नहीं देख पाए ऐसे में उन्होंने केवड़े के फूल को भोलेनाथ के मुकुट से नीचे गिरा दिया। उसके बाद फूल से शिखर के बारे में पूछा। ऐसे में फूल ने कहा वह चालीस हजार साल से गिरा पड़ा है। ऐसे में उन्हें लगा की वह शीर्ष तक नहीं जा पाएंगे। ऐसे में उन्होंने फूल को झूठी गावहिं देने के लिए मना लिया और कहा कि उन्होंने शिव का शीर्ष देखा है।

Must Read : आज इंदौर के इस स्कूल में हो रहा Indian Idol 13 का ऑडिशन, देखें डिटेल्स

इस बात से शंकर जी को क्रोश आ गया। और उन्होंने ब्रह्माजी को श्राप दे दिया। शंकर जी ने श्राप दिया कि उनका कोई मंदिर पृथ्वी पर नहीं बनेगा। उसके साथ ही केवड़े के फूल को भी उन्होंने श्राप दिया। उसके बाद से ही वह उनकी पूजा में इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आपको बता दे, जिस जगह पर शंकर जी ने ब्रह्माजी को श्राप दिया था वो यही मंदिर है। स्थल तिरुवनमलाई पर ही उन्होंने श्राप दिया था।

मंदिर के दर्शन के लाभ –

आपको बता दे, विश्व के इस बड़े मंदिर के दर्शन करने से हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ये मंदिर अरुणाचलेश्वर मंदिर पहाड़ पर है। इस पर्वत की ऊंचाई 2668 फीट है। खास बात ये है कि यहां 8 दिशाओं में आठ शिवलिंग हैं। ऐसे में यहां हर शिवलिंग के दर्शन करने से लाभ मिलता है। इतना ही नहीं यहां दीप दान करने का भी काफी महत्व माना गया है।