2023 तक इस राशि पर रहेगी शनि की साढ़े साती, बुरे प्रभाव से बचाएंगे ये छोटे उपाय

शनि (Shani Dev) की साढ़े साती का असर जातकों के जीवन पर काफी ज्यादा देखने को मिलता है। किसी के जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ता है तो किसी के जीवन में बुरा प्रभाव देखने को मिलता है।

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शनि (Shani Dev) की साढ़े साती का असर जातकों के जीवन पर काफी ज्यादा देखने को मिलता है। किसी के जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ता है तो किसी के जीवन में बुरा प्रभाव देखने को मिलता है। आपको बता दे, शनि देव को प्रसन्न करना बेहद कठिन होता है। लेकिन अगर ये किसी व्यक्ति से प्रसन्न रहते है तो उसका जीवन सवर जाता है, वहीं अगर शनिदेव किसी व्यक्ति से नाराज रहते है या उस पर साढ़े साती का प्रभाव रहता है तो उसके जीवन में काफी ज्यादा परेशानियां बनी रहती है।

ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी राशि के बारे में बताने जा रहे है जिसकी साढ़े साती 2023 तक रहेगी। ऐसे में शनि के बुरे प्रभाव से बचने के लिए कुछ उपाय भी हम आपको बताने जा रहे है जिसकी मदद से आप बुरे प्रभाव से बच सकते हैं। तो चलिए जानते है –

आपको बता दे, 45 दिनों के बाद शनि एक बार फिर 141 दिन के लिए वक्री हो रहे है। ऐसे में धनु राशि पर 12 जुलाई से शनि की साढ़े साती शुरू हो रही है जो कि अगले साल यानि 2023 तक रहने वाली है। ऐसे में इस राशि के जातकों को शनि का प्रकोप सहन करना पड़ सकता है।

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इसको लेकर ज्योतिषों का कहना है कि धनु राशि वाले लंबे समय तक साढ़े साती का शिकार रहने वाले है। ऐसे में इन्हे कुछ उपाय करना बेहद जरुरी है। इसके अलावा मकर राशि और कुंभ राशि पर भी शनि की साढ़ेसाती का प्रकोप देखने को मिलेगा।

ज्योतिषों द्वारा बताया गया है कि शनि देव अनाज के चढ़ावे से बेहद खुश रहते है। ऐसे में इन राशि के जातकों को भी शनि को जौ, गेहूं, चावल, तिल, कंगनी, उड़द और मूंग के अनाज का चढ़ावा चढ़ाना चाहिए। इससे वह शनि देव के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं।

आपको बता दे, शनिदेव को सप्त धान्य इसलिए प्रिय है क्योंकि जब शनिदेव चिंता में थे तो नारद मुनि ने शनिदेव से उनकी परेशानी का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि फलों के अनुसार उनको सप्त ऋषियों के साथ न्याय करना है। जिस पर नारद मुनि ने कहा कि कुछ भी करने से पहले शनिदेव को ऋषियों की परीक्षा लेनी पड़ेगी।

ऐसे में ये सुन शनि देव की चिंता थोड़ी कम हुई और वह एक ब्राह्मण का भेष धारण कर सप्त ऋषियों के पास चले गए। ऐसे में उन्होंने सप्त ऋषियों के सामने शनिदेव की बुराई शुरू कर दी। जिस पर सप्त ऋषियों ने कहा कि शनिदेव तो कर्मों का फल देते है। वो सूर्य पुत्र है।

इस बात को सुन वह प्रसन्न हो गए और उन्होंने अपने स्वरुप में आकर सभी ऋषियों को दर्शन दिए। ऐसे में ऋषियों ने उन्हें अनाज दिए। जिससे शनि देव प्रसन्न हो गए। इसके बाद शनि देव ने कहा था कि अब जातक मेरी सप्त धान्य से पूजा करेंगे। जिसकी वजह से उन पर मेरे बुरे प्रभाव का असर नहीं होगा। तभी से ये परंपरा चलती आ रही है।