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Mon, Dec 8, 2025

उत्पन्ना एकादशी पर इन नियमों का रखें खास ख्याल, भूलकर भी न करें ये गलतियां

Written by:Diksha Bhanupriy
शास्त्रों में एकादशी तिथि का बहुत महत्व माना गया है। इसमें से उत्पन्ना एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अभी हम आपको इस दिन से जुड़े व्रत के नियम बता देते हैं।
उत्पन्ना एकादशी पर इन नियमों का रखें खास ख्याल, भूलकर भी न करें ये गलतियां

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की बात करें तो इसे उत्पन्ना एकादशी (Utpanna Ekadashi 2025) के नाम से पहचाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है उसके सभी पापों का नाश हो जाता है। इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक उत्पन्ना एकादशी वही दिन है जब भगवान विष्णु के शरीर से देवी एकादशी प्रकट हुई थी। उन्होंने मूर नामक राक्षस का वध भी किया था। यही कारण है की एकादशी को सभी व्रत की शुरुआत का प्रतीक कहा जाता है। चलिए जान लेते हैं कि इस दिन किन नियमों का पालन करना जरूरी है।

उत्पन्ना एकादशी पर क्या करें? (Utpanna Ekadashi 2025)

  • एकादशी के व्रत के एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को आपको सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है।
  • एकादशी पर सूर्योदय के पहले उठकर पवित्र नदी या तलाब में स्नान करें। इसके बाद आपको ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करना है।
  • अब भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और एकादशी देवी की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें। अब आपको धूप, दीप, फल और तुलसी पत्र अर्पित करें। आपको भगवान की विधिपूर्वक पूजन करनी होगी।
  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजन के साथ तुलसी के पौधे की पूजन करना भी जरूरी माना गया है। शाम के समय तुलसी पर गीत दीपक जरूर जलाएं। ये पूजा आपको तुलसी को बिना छुए करना है।
  • व्रत के दिन एकादशी की कथा जरूर पढ़ें या फिर सुनें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना गया है।
  • रात को भजन कीर्तन और जागरण जरूर करें।
  • व्रत का पारण आपको अगले दिन द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में करना होगा। पारण में ब्राह्मणों को भजन जरूर कराएं और दान जरूर करें।

इन बातों का रखें ध्यान

  • एकादशी के दिन चावल, जौ और दाल का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए। इन चीजों के सेवन से पाप लगता है।
  • इस दिन मांसाहार, प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करना शुभ नहीं माना गया है।
  • इस दिन क्रोध, ईर्ष्या, निंदा, प्रतिशोध और अपशब्द का भाव बिल्कुल ना रखें। बिल्कुल सहज और शांत व्यवहार करें।
  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए अगर आपको जरूरत है तो आप एक दिन पहले पत्ते तोड़ कर रख सकते हैं।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।