आखिर समुद्र का पानी क्यों होता है खारा? जानिए पौराणिक कथा

Sanjucta Pandit
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Samudra Water Salty : समुद्र जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह अपने आप में कितना विशाल होगा। इसे देखने पर सामने केवल पानी-ही-पानी नजर आता है। बता दें कि हमारी पृथ्वी का लगभग 70% हिस्सा पानी से भरा है। जिसमें छोटे-छोटे नदी, नालों से लेकर समुद्र और महासागरों भी शामिल है। अक्सर हम सभी समुद्र का नजारा देखने बीच पर जाते हैं, वहां जाकर समुद्र के पानी को हाथ में उठते हैं। इसके अलावा, कई लोग समुद्र के जल से स्नान भी करते हैं। इस दौरान आपने नोटिस किया होगा कि आपका हाथ खारा हो जाता है और यदि आप इसे टेस्ट करते हैं तो इसका पानी नमकीन लगता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर समुद्र का जल खारा क्यों होता है। दरअसल, इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। आइए जानते हैं विस्तार से…

आखिर समुद्र का पानी क्यों होता है खारा? जानिए पौराणिक कथा

पहली मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि दुर्वासा के श्राप से स्वर्ग की सुख-शांति, यश, वैभव सब खत्म हो गया था। जिसके कारण देवताओं के बीच हाहाकार मच गया। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए सभी मिलकर भगवान विष्णु के पास गए और अपनी समस्या बताते हुए उनसे इसका हल मांगा। वहीं, श्री हरि ने उन्हें बताया कि यदि वो दानवों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करते हैं और उसमें से निकले अमृत को पीते है तो वो सदैव के लिए अमर हो जाएंगे। जिसके बाद देवताओं और असुरों में इस विषय को लेकर वार्तालाप हुआ और फिर समुद्र मंथन किया गया। इस दौरान अमृत के साथ बहुत सारे रत्न निकले थे। इसलिए ऐसी मान्यता है कि इस कारण समुद्र का पूरा पानी खारा हो गया।

दूसरी मान्यता

वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार, इसके पीछे माता पार्वती का हाथ माना जाता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं माता पार्वती भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी और वह उन्हें अपने पति के रूप में पाना चाहती थी। जिसके लिए उन्होंने तपस्या करना शुरू किया। अपनी तपस्या में लीन मां पार्वती मन- ही-मन भगवान शिव को अपना स्वामी मान चुकी थी। इसी दौरान समुद्र देव की नजर देवी पार्वती पर पड़ी, जिन्हें देखकर वह मोहित हो गए और उन्होंने उनसे विवाह करने का मन बना लिया। जिसके बाद अपने इस प्रस्ताव को देवी की तपस्या खत्म होने के बाद रखा। जिसे सुनकर माता ने उन्हें जवाब दिया कि प्रभु शंकर को अपना पति मान चुकी हूं, इसलिए मैं आपके इस प्रस्ताव को ठुकराती हूं। उनकी इस बात को सुनकर समुद्र देव को क्रोध आ गया और उन्होंने गुस्से में आकर कहा कि आखिर ऐसा क्या है शिव में जो मुझ में नहीं है। मैं पृथ्वी लोक के समस्त मानव जाति की प्यास बुझाता हूं। इतना सुनते ही माता को क्रोध आ गया। इसके बाद उन्होंने समुद्र देव को श्राप दे देते हुए कहा जिस जल के कारण आज तुम इतना अहंकार कर रहे हो, अब तुम्हारा यह जल किसी के पीने योग्य नहीं रहेगा। तब से ही समुद्र का पानी खारा हो गया और इसका जल किसी के पीने योग्य नहीं रहा।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)


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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।

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