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इंस्टाग्राम रील ने बदली जिंदगी: 17 साल बाद सागर से लापता बेटी अपने परिवार से मिली, ‘मंडी बामोरा’ के बोर्ड ने जगा दी बचपन की भूली यादें

Written by:Shruty Kushwaha
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सत्रह साल का इंतज़ार सिर्फ समय का बीतना नहीं होता..वह उम्मीद, दर्द, खोए हुए चेहरे और अधूरी पुकारों का लंबा सफर होता है। एक परिवार ने अपनी छोटी बेटी को खोया था और समय के साथ उसकी याद भी धुंधली पड़ने लगी थी। दूसरी तरफ वही बच्ची बड़ी हो रही थी लेकिन उसके भीतर कहीं गहराई में एक अधूरी छवि छिपी हुई थी। दोनों तरफ की दुनिया आगे बढ़ती रही, लेकिन फिर एक दिन इंस्टाग्राम पर उसे एक रील दिखी और जैसे जीवन ही बदल गया।
इंस्टाग्राम रील ने बदली जिंदगी: 17 साल बाद सागर से लापता बेटी अपने परिवार से मिली, ‘मंडी बामोरा’ के बोर्ड ने जगा दी बचपन की भूली यादें

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सत्रह साल पहले गुम हुई एक मासूम बच्ची, जो अब 27 साल की विवाहित महिला है..अपने उस परिवार से मिलती है जिनकी यादें भी पूरी तरह धुंधला गई थी। सागर के मंडी बामोरा पुलिस चौकी में हुआ यह मिलन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। इंस्टाग्राम की एक रील ने उस धुंधली याद को जगा दिया, जिसने इस असंभव से लगने वाले पारिवारिक मिलन को हकीकत में बदल दिया।

इन दिनों रील्स का खूब क्रेज है। लेकिन मंडी बामोरा में एक रील ने जो किया, वो किसी ने सोचा भी नहीं था। लोग रील बनाते हैं लाइक्स के लिए, फॉलोअर्स के लिए, ट्रेंडिंग के लिए, फेमस होने के लिए। लेकिन एक रील ने सत्रह साल से बिछड़ी बेटी को उसके परिवार की छांव में वापस लौटा दिया। हालांकि उस रील में ऐसा कुछ खास नहीं था..बस एक पुराना रेलवे स्टेशन का बोर्ड था। लेकिन वो बोर्ड ही किसी की जिंदगी का अहम मुकाम बन गया।

सत्रह साल पहले लापता हुई दस साल की बच्ची

इस कहानी की शुरुआत होती है सत्रह साल पहले। 11 फरवरी 2008 को मंडी बामोरा क्षेत्र से 10 साल की एक बच्ची लापता हो गई थी। परिजनों ने उसे खूब तलाशा..पुलिस में गुमशुदगी का मामला भी दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2014 में गुमशुदा नाबालिगों के प्रकरण में अपराध दर्ज किए जाने के निर्देश के बाद बच्ची की तलाश में थाना बीना में अपहरण का केस भी दर्ज हुआ। लेकिन सालों तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। माता-पिता की उम्मीदें टूटती गईं और आखिर एक ऐसा वक्त आया जब उन्होंने हार मान ली।

अहमदाबाद से मंडी बामोरा तक का सफर

उधर वो मासूम बच्ची जानें कैसे रेलवे स्टेशन पहुंच गई। किसी ट्रेन में सवार हो गई जो उसे अहमदाबाद ले गई। बच्ची की किस्मत अच्छी थी कि उसपर एक परिवार की नज़र पड़ गई। वो भले लोग थे और बच्ची को इस हाल में देखकर उन्होंने उसे अपना लिया। अपने घर में पनाह दी, पाला-पोसा, पढ़ाया और उसकी शादी भी कराई। इस दौरान बच्ची को सिर्फ इतना याद था कि उसके नाना-नानी भोपाल में रहते हैं। ये जानकारी मिलने पर दत्तक परिवार उसे भोपाल लेकर भी गया, लेकिन सटीक पता न मिलने से ये कोशिश भी नाकाम रही।

इंस्टाग्राम रील ने जगा दी यादें

अब उस घटना को सालों बीच चुके थे। साल 2025 में अब वो एक विवाहित युवती है। एक दिन वो इंस्टाग्राम पर कुछ स्क्रॉल कर रही थी और उसी दौरान उसे एक रील दिखी। उसमें मंडी बामोरा रेलवे स्टेशन का बोर्ड दिखा। अचानक उसके दिमाग़ में कुछ कौंधा। बचपन की धुंधली यादें ताजा हो उठीं। उसने अपने पति से यह बात बताई जिसके बाद उन्होंने तुरंत मंडी बामोरा पुलिस चौकी से संपर्क किया।

पुलिस की संवेदनशीलता ने एक परिवार की खुशियां लौटाई

जब सागर पुलिस के पास ये खबर पहुंची तो एकबारगी वो भी चौंक गए। फिर चौकी प्रभारी और उनकी टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया। युवती और उसके पति को मंडी बामोरा बुलाया गया। इसके बाद सारे पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और उस आधार पर परिजनों को चौकी बुलाया गया। लेकिन युवती अपने माता-पिता के सामने आई तो वह उन्हें पहचान नहीं पाई। आखिर इतने साल बाद उसके ज़हन से माता पिता का चेहरा भी तो गुम हो गया था। लेकिन पिता की नजर उसके माथे पर पड़े उस पुराने चोट के निशान पर गई जो उसे बचपन में लगी थी। बस, फिर क्या..पिता की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। परिवार ने उसे गले से लगा लिया और सत्रह साल की तलाश खत्म हुई। इस घटना के बाद परिवार ने पुलिस का हृदय से आभार जताया है। लापता लड़की को परिवार से मिलाने में पुलिस का अहम योगदान तो है ही..लेकिन उस इंस्टाग्राम रील का भी महत्वपूर्ण रोल है  जिसे देखकर उस युवती को अपने बचपन की याद ताजा हो गई।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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