नम आंखों से नमन ओझा ने क्रिकेट को कहा अलविदा, सचिन तेंदुलकर को बताया अपना आदर्श

इंदौर, आकाश धोलपुरे। मध्यप्रदेश के युवा और होनहार क्रिकेटर नमन ओझा (Naman Ojha) ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों फार्मेट से संन्यास (retire from cricket) ले लिया है। अपने होम ग्राउंड इंदौर में क्रिकेट को अलविदा कहते वक्त नमन की आँखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा जिसे वो अपने काले चश्मे के पीछे छिपाते रहे।

दरअसल, नमन ओझा मूलतः रतलाम से ताल्लुक रखते हैं। रतलाम के लिये उन्होंने क्रिकेट भी खेला लेकिन इंदौर में उन्हें क्रिकेट को नई ऊंचाइयां मिली। उन्होंने टीम इंडिया के लिए टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों ही फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्हें 2010 में टीम इंडिया के जिम्बाब्वे दौरे से इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला था। उस दौरे पर एक वनडे और दो टी-20 खेलने के बाद वे टीम से बाहर हो गए। उन्होंने वनडे में 1 और दो टी-20 में 12 रन बनाए और 4 साल बाद इंडिया-ए के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर लगातार दो दोहरे शतक लगाने के बाद उन्हें 2015 में भारत के श्रीलंका दौरे पर टेस्ट में डेब्यू करने का मौका मिला। हालांकि, यह उनका पहला और इकलौता टेस्ट ही साबित हुआ। टेस्ट में उन्होंने 56 रन बनाए थे इसके अलावा चार कैप भी पकड़ने वो कामयाब रहे।

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इसे शायद उनकी खराब किस्मत ही कहा जाएगा कि वो एमएस धोनी (MS Dhoni) की प्रतिभा के आगे दब गए, लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो उनकी प्रतिभा के साथ ही उनका लक भी नहीं चला। लिहाजा, अब 37 साल के नमन ने क्रिकेट को अलविदा कहकर बल्ले को साइड रख दिया है और विकेटकीपर के दस्तानों को उतार दिया है।

आंखों में आंसू लिए नमन ओझा ने सोमवार को भरे मन से कहा कि उनकी कमर में दर्द और परिवार को कम समय देने के चलते वो क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि वो क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) से प्रभावित रहे हैं और उनसे उन्होंने काफी कुछ सीखा है। वहीं कप्तान विराट कोहली (Virat kohli) द्वारा टेस्ट कैप पहनाने वाले दिन को उन्होंने यादगार बताया और कहा कि वो अब छोटे फार्मेट के क्रिकेट पर ध्यान देंगे। बता दें कि नमन ओझा न सिर्फ रतलाम, बल्कि मध्यप्रदेश की भी बड़ी उम्मीद थे, लेकिन बढ़ती उम्र और नए क्रिकेटर्स के पदार्पण के चलते आखिरकार उन्हें अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा।