नस्लभेदी टिप्पणी करने वालों की खैर नहीं, इस बार स्टैंड्स में मौजूद होंगे जासूस

एजबेस्टन टेस्ट के दौरान स्टैंड्स में मौजूद भारतीय फैंस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया था कि मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों को नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, जिसके बाद ईसीबी और एजबेस्टन के अधिकारियों ने मांफी भी मांगी थी और जांच कराने का भरोसा दिया था।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। काफी समय से इंग्लैंड के दर्शकों द्वारा खिलाड़ियों के ऊपर की जा रही नस्लभेदी टिप्पणी के मद्देनजर इस बार इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB), ऐसे प्रशंसको की पहचान कर उनके ऊपर उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए स्टैंड्स में अपने जासूस बैठाएगा। भारत और इंग्लैंड के बीच शनिवार 9 जुलाई को बर्मिंघम के एजबेस्टन स्टेडियम में दूसरा टी-20 मैच खेला जाना है। इससे पहले भारत और इंग्लैंड के बीच इसी मैदान पर पांचवें टेस्ट के दौरान भारतीय दर्शकों पर नस्लीय टिप्पणियों की गई थी, जिसके चलते बोर्ड को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

ये पहली बार नहीं है, जब खिलाड़ियों को इस तरह की टिप्पणियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। आजकल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में ये आम बात हो गई है। हालांकि, भारतीय खिलाड़ियों के साथ किए गए इस तरह के व्‍यवहार के लिए इंग्लिश बोर्ड ने माफी भी मांगी थी, जहां उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट का लिखा था, “हमें यह पढ़कर बहुत दुख है और हम इस तरह के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। हम टेस्ट मुकाबले में नस्लवादी दुर्व्यवहार की रिपोर्ट सुनकर चिंतित हैं। हम एजबेस्टन के अधिकारियों के संपर्क में हैं, जो इस मामले की जांच करेंगे। क्रिकेट में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है।”

ये भी पढ़े … लापरवाही पर बड़ा एक्शन, पंचायत सचिव सहित 13 कर्मचारी निलंबित, कई को नोटिस जारी

बता दे, एजबेस्टन टेस्ट के दौरान स्टैंड्स में मौजूद भारतीय फैंस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया था कि मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों को नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, जिसके बाद ईसीबी और एजबेस्टन के अधिकारियों ने मांफी भी मांगी थी और जांच कराने का भरोसा दिया था।

इंग्लैंड के खिलाड़ी भी कर चुके है नस्लीय टिप्पणी

दर्शक तो दर्शक, इंग्लैंड के खिलाड़ी भी नस्लीय टिप्पणी कर चुके है। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ओली रॉबिन्सन को डेब्यू करने के बाद एक पुराने ट्वीट के लिए ईसीबी की तरफ से 8 मैचों का प्रतिबंध झेलना पड़ा था।