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अगर मैसेज के पीछे लिखे G, T, P या S कोड को समझ गए तो कभी भी फ्रॉड का नहीं होंगे शिकार, पढ़ें खबर

Written by:Rishabh Namdev
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क्या आपके साथ भी मैसेज के जरिए फ्रॉड किया गया है? क्या आपको कभी बैंक द्वारा भेजे गए मैसेज और फ्रॉड मैसेज में फर्क समझ नहीं आया? चलिए आज हम आपको आसान तरीके से समझाते हैं कि किस प्रकार से आप इन मैसेज को पहचान सकते हैं और फ्रॉड होने से आसानी से बच सकते हैं।
अगर मैसेज के पीछे लिखे G, T, P या S कोड को समझ गए तो कभी भी फ्रॉड का नहीं होंगे शिकार, पढ़ें खबर

आज के समय में साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। कई बार ऐसा देखा गया है कि लोगों को मैसेज के जरिए ठगा जाता है। कई लोग यह नहीं समझ पाते कि मैसेज फ्रॉड है या सेफ, और वे अपनी जानकारी गलत हाथों में सौंप देते हैं, जिससे उन्हें अंत में खामियाजा भुगतना पड़ता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कैसे यह पहचाना जाए कि हमारे फोन पर आने वाला मैसेज सरकारी है या किसी फ्रॉड द्वारा भेजा गया है? चलिए हम आपको एक आसान सा तरीका बताते हैं, जिसकी मदद से आप इन मैसेज को आसानी से पहचान सकेंगे।

ऐसे पहचाने सरकारी मैसेज

बता दें कि सरकारी मैसेज को पहचानना बेहद आसान है। अगर आपके फोन पर आए मैसेज के पीछे “-G” लगा हुआ है, तो आप समझ जाइए कि यह सरकार द्वारा भेजा गया मैसेज है। आप इसे खोलकर पढ़ सकते हैं और इसमें दी गई जानकारी को सेफ मान सकते हैं। इसके अलावा अगर आपके मैसेज के पीछे “-K” लगा है और उसमें सतर्क रहने की सलाह दी गई है, तो यह मैसेज ट्राई (TRAI) की ओर से भेजा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, हर सरकारी मैसेज के पीछे “-G” होता है।

मैसेज के पीछे “-S” लिखा हुआ हो

इसके अलावा अगर आपके फोन पर आए मैसेज के पीछे “-S” लिखा हुआ है, तो यह सर्विस के लिए होता है। यानी इस मैसेज से भी घबराने की जरूरत नहीं है, यह पूरी तरह से सेफ होता है। अक्सर कंपनियां सर्विस से जुड़ी जानकारी देने के लिए इस प्रकार के मैसेज भेजती हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप आइडिया, जियो, एयरटेल या किसी भी टेलीकॉम कंपनी से जुड़े हुए हैं, तो अक्सर ये कंपनियां रिचार्ज या अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी के लिए मैसेज भेजती हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन मैसेज के पीछे हमेशा “-S” लगा होता है।

बैंक द्वारा भेजे गए मैसेज के पीछे क्या लगा होता है?

सबसे महत्वपूर्ण मैसेज बैंक से आने वाले होते हैं। अक्सर फ्रॉड इसी प्रकार के मैसेज में किया जाता है। कई बार लोग यह नहीं समझ पाते कि बैंक द्वारा भेजा गया मैसेज असली है या नकली। बता दें कि बैंक द्वारा भेजे गए मैसेज के पीछे हमेशा “-T” लगा होता है। यानी अगर आपके खाते या किसी ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी भेजी जा रही है, तो ऐसे मैसेज के पीछे “-T” लगा होगा।

पीछे अगर “-P” लिखा हुआ नजर आए

इसके अलावा, किसी भी मैसेज के पीछे अगर “-P” लिखा हुआ नजर आता है, तो यह किसी कंपनी द्वारा भेजा गया प्रमोशनल मैसेज होता है। इस मैसेज से भी घबराने की जरूरत नहीं है। बता दें कि ये कोड वर्ड्स इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों, बैंकों और मैसेज सेंडर्स को TRAI के डीएलटी प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। ऐसे में साइबर अपराधियों को ये कोड नहीं मिलते, जिसके कारण उनके मैसेज के पीछे किसी भी प्रकार का कोड नहीं होता है।

इसलिए अगली बार जब भी आपके पास कोई मैसेज आए, तो उसके पीछे जरूर देखें कि उसमें “G”, “T”, “P” या “S” जैसे कोड हैं या नहीं। अगर मैसेज के पीछे कोई कोड नहीं लगा है, तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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