नेशनल टेक्नोलॉजी डे 2022 : इसे क्यों मनाया जाता है? जानिए इसका महत्व और इस साल की थीम

इस धरती पर जब से समाज की रचना हुई है, तब से लेकर आज तक, एक चीज सामान्य रही है और वह है 'विकास'। एक समाज के उत्थान और विकास में साइंस और टेक्नोलॉजी का बहुत बड़ा योगदान रहा है, इसलिए इस प्रगति को चिह्नित करने के लिए 11 मई को राष्ट्रीय टेक्नोलॉजी दिवस मनाया जाता है। इस उन्नति में भारतीयों ने हमेशा महान आविष्कारों के साथ टेक में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। इस धरती पर जब से समाज की रचना हुई है, तब से लेकर आज तक, एक चीज सामान्य रही है और वह है ‘विकास’। इस दौरान बहुत सी सम्भ्यतांए आई और वक्त के साथ हवा भी हो गई, लेकिन इस दौरान हमने विज्ञान के क्षेत्र में जो कार्य किए, वो सदियों से चले आ रहे और इतना ही नहीं दिन-प्रतिदिन नए-नए अविष्कार के साथ, वो हमारे जीने के तरीके को भी आसान बना रहे है।

एक समाज के उत्थान और विकास में साइंस और टेक्नोलॉजी का बहुत बड़ा योगदान रहा है, इसलिए इस प्रगति को चिह्नित करने के लिए 11 मई को राष्ट्रीय टेक्नोलॉजी दिवस मनाया जाता है। इस उन्नति में भारतीयों ने हमेशा महान आविष्कारों के साथ टेक में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

यह दिन एयरोस्पेस इंजीनियर और पूर्व भारतीय राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति) की वर्षगांठ का भी प्रतीक है। इसके सफल परीक्षण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने ‘राष्ट्रीय टेक्नोलॉजी दिवस’ मनाने का आहान किया।

हर साल इसे नई थीम के तहत मनाया जाता है। जैसे 2022 की थीम है – “सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” (Integrated Approach in Science & Technology for Sustainable Future) है। थीम का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

नेशनल टेक्नोलॉजी डे का संक्षिप्त इतिहास

टेक्नोलॉजी दिवस पहली बार 11 मई 1999 को मनाया गया था। जबकि 11 मई 1998 को, भारत ने राजस्थान में भारतीय सेना के पोखरण टेस्ट रेंज में ऑपरेशन शक्ति के तहत तीन सफल परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद, 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए।

जिसके बाद 11 मई 1999 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे देश की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और तब से, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ-साथ उनके तकनीकी आविष्कारों का सम्मान करता है जिन्होंने भारत के विकास में कुछ मूल्यों को जोड़ा है।

1998 में आज ही के दिन भारत थर्मोन्यूक्लियर हथियार और विखंडन बम (fission bomb) विकसित करने में सक्षम था। इस दिन भारत ने एक और खास उपलब्धि हासिल की थी। आज ही के दिन भारत के पहले स्वदेशी विमान हंसा -1 ने उड़ान भरी और डीआरडीओ ने सतह से हवा में मार करने वाली त्रिशूल मिसाइल का भी परीक्षण किया।

इस दिन हर साल भारतीय प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड व्यक्तियों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करता है। इस अवसर पर, भारत भर के इंजीनियरिंग कॉलेज वैज्ञानिक प्रयासों का समर्थन करने और छात्रों के बीच रुचि को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।