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महाशिवरात्रि के बाद उज्जैन में गूंजेगा ‘हर हर महादेव’, बाबा महाकाल की भव्य बारात को लेकर शहर में जबरदस्त उत्साह

Written by:Bhawna Choubey
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महाशिवरात्रि के बाद उज्जैन फिर बना दुल्हन सा शहर। शिव-पार्वती विवाह उत्सव, बाबा महाकाल की बारात और नगर भोज को लेकर हर गली में उत्साह, छपी विवाह पत्रिकाओं से बढ़ा धार्मिक जोश।
महाशिवरात्रि के बाद उज्जैन में गूंजेगा ‘हर हर महादेव’, बाबा महाकाल की भव्य बारात को लेकर शहर में जबरदस्त उत्साह

महाशिवरात्रि का पर्व खत्म होते ही उज्जैन का माहौल एक बार फिर पूरी तरह बदल गया है। अभी कुछ दिन पहले तक जहां लोग रात्रि जागरण और शिव आराधना में डूबे थे, वहीं अब शहर में शादी जैसा रंग दिखाई देने लगा है। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के आंगन से लेकर छोटी-छोटी गलियों तक हर जगह शिव-पार्वती विवाह उत्सव की चर्चा है। लोग इसे सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने परिवार की शादी जैसा मानकर तैयारियां कर रहे हैं।

उज्जैन, जिसे प्राचीन समय में अवंतिका कहा जाता था, इन दिनों सच में शिवमय नजर आ रहा है। बाबा महाकाल की बारात की तैयारियों ने शहर में नया उत्साह भर दिया है। छपी हुई विवाह पत्रिकाएं घर-घर बांटी जा रही हैं, जिनमें हल्दी, मेहंदी, शुभ लग्न और रिसेप्शन तक का पूरा कार्यक्रम लिखा गया है। इस बार 26 फरवरी 2026 को होने वाले शिव-पार्वती विवाह को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।

महाशिवरात्रि के बाद शिव-पार्वती विवाह उत्सव की परंपरा

उज्जैन में महाशिवरात्रि के बाद शिव-पार्वती विवाह उत्सव मनाने की परंपरा नई नहीं है। पिछले 26 वर्षों से ‘शयन आरती परिवार’ इस आयोजन को लगातार करता आ रहा है। यह परंपरा अब इतनी लोकप्रिय हो चुकी है कि इसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग उज्जैन पहुंचते हैं।

शिव-पार्वती विवाह उत्सव में वही सभी रस्में निभाई जाती हैं, जो एक सामान्य हिंदू विवाह में होती हैं। गणपति पूजन से शुरुआत होती है, फिर हल्दी-मेहंदी की रस्म और उसके बाद शुभ लग्न। इस पूरे कार्यक्रम को इस तरह सजाया जाता है कि हर भक्त को लगता है जैसे वह किसी अपने के विवाह में शामिल हो रहा हो। बाबा महाकाल की बारात पूरे शहर में निकलती है और लोग रास्तों में खड़े होकर दर्शन करते हैं।

इस बार भी 25 फरवरी को गणपति पूजन और हल्दी-मेहंदी का कार्यक्रम तय किया गया है, जबकि 26 फरवरी को शाम 4 बजे से कुमावत मारवाड़ी धर्मशाला, नृसिंह घाट के सामने विवाह और रिसेप्शन होगा। यह जानकारी विवाह पत्रिका में साफ-साफ लिखी गई है।

महाशिवरात्रि के बाद उज्जैन में शिव-पार्वती विवाह की धूम,

बाबा महाकाल की बारात

बाबा महाकाल की बारात उज्जैन की सबसे खास धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। जब यह बारात निकलती है तो पूरा शहर थिरक उठता है। ढोल-नगाड़ों की आवाज, भजन-कीर्तन, फूलों की वर्षा और जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।

इस बार भी बारात को भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है। आयोजकों के अनुसार, बारात में पारंपरिक वेशभूषा में लोग शामिल होंगे। नंदी महाराज की झांकी, देवताओं के स्वरूप और धार्मिक ध्वज इस बारात को खास बनाएंगे। श्रद्धालु बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए घंटों पहले से सड़कों पर खड़े हो जाते हैं।

उज्जैन के व्यापारी भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बाजारों को सजाया जा रहा है। कई जगहों पर रंगोली बनाई जा रही है और लाइटिंग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा महाकाल की बारात के दिन उज्जैन की रौनक देखने लायक होती है।

छपी विवाह पत्रिकाओं ने बढ़ाया उत्साह

इस बार शिव-पार्वती विवाह उत्सव की खास बात यह है कि पारंपरिक शादी की तरह छपी हुई विवाह पत्रिकाएं बांटी जा रही हैं। पत्रिका के कवर पर साफ लिखा है कि 26 फरवरी 2026 को शिव-पार्वती विवाह और रिसेप्शन का आयोजन होगा।

पत्रिका के अंदर पूरा कार्यक्रम दिया गया है। 25 फरवरी को गणपति पूजन और हल्दी-मेहंदी, जबकि 26 फरवरी को शुभ लग्न का समय। इसमें गणेश, कार्तिकेय, नंदी महाराज, वीरभद्र सहित तैंतीस कोटि देवताओं और अवंतिका वासियों को विवाह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।

सबसे पहले यह पत्रिका भगवान गणेश मंदिर में अर्पित की गई, उसके बाद महाकाल मंदिर और उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में निमंत्रण पहुंचाया गया। इससे धार्मिक माहौल और भी गहरा हो गया है। लोग इसे अपने घर की शादी की तरह सहेज कर रख रहे हैं।

नगर भोज और सामूहिक भागीदारी का महत्व

शिव-पार्वती विवाह उत्सव के बाद नगर भोज का आयोजन भी किया जाता है। इसमें हजारों लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एकता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है।

नगर भोज में साधु-संत, स्थानीय निवासी और बाहर से आए श्रद्धालु एक साथ बैठते हैं। इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाता है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

इस आयोजन से उज्जैन की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है। होटल, दुकानें, फूल विक्रेता, हलवाई और छोटे व्यापारी सभी को काम मिलता है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी यह उत्सव अहम माना जाता है।

उज्जैन में शिवमय वातावरण, बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

महाशिवरात्रि के बाद भी उज्जैन में श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हुई है। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। शिव-पार्वती विवाह उत्सव की खबर सुनकर कई श्रद्धालु विशेष रूप से इन तारीखों में आने की योजना बना रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन भी तैयारियों में जुट गया है। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इस बार पिछले साल से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।

 

 

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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