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मजिस्ट्रेट सिखा रहीं बच्चों को जीवन का पाठ

हरदा| सामाजिक समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बच्चों को सही सीख देना आवश्यक है, जाने अनजाने में हुए अपराध के कारण खुद को समाज से अलग न समझे और अपने अतीत को भूलकर भविष्य को संवारने के लिए अग्रसर हो, ऐसे ही बच्चों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए मार्गदर्शन देने की दिशा में किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान न्यायाधीश श्रीमती नमिता द्विवेदी की पहल रंग ला रही है| किशोर न्याय बोर्ड परिसर के चाइल्ड फ्रेंडली वातावरण में जिला प्रशासन के सहयोग से शुक्रवार को आयोजित शिविर में 50 बच्चों ने बेहतर जीवन यापन के तौर तरीके सीखे। बच्चों के लिए दीदी बनकर न्यायाधीश ने उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए शिक्षित किया व समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया | 

इस पहल के बारे में श्रीमती द्विवेदी कहती हैं कि आखिर ये बच्चे भी तो हमारे जैसे हैं, हमारी तरह ही बात करते और हमारी तरह ही दिखते हैं फिर क्यों इनके जाने अंजाने हुए विधि विरोधी कार्य के कारण ये सामान्य नागरिक की तरह जीवन यापन करने से वंचित रहें। यहां बच्चों को शिक्षित होकर आत्मनिर्भरता की समझाईश दी गई। कहा गया कि शिक्षा एवं मेहनत ऐसे साधन है, जिसके बल पर आप सभी देश के भावी नागरिक बन समाज में अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि इस बच्चे को टिमरनी के अस्पताल में सामुदायिक सेवा के लिए भेजा गया था। उसकी कार्य के प्रति लगन का नतीजा है कि अस्पताल प्रशासन ने उसे जाब आफर की है। जब वो ये हासिल कर सकता है तो आप क्यों नहीं। शिविर के दौरान बच्चों का स्वास्थ परीक्षण किया गया,आवश्यक्तानुसार दवाईयां दी गई।

शिविर में बच्चों के लिए अलग—अलग तरह के कौशल प्रशिक्षण देने एवं आपराधिक मानसिकता में बदलाव के लिए भी काऊंसलर मौजूद रहे । जिसके दम पर बच्चे बालिग होने पर रोजगार कर सकेंगे। यहां न केवल विभिन्न प्रशिक्षण दिए जाने के सुझाव थे बल्कि बच्चों की मंशा मुताबिक उन्हें मनोरंजन उपलब्ध कराना भी शामिल था। बच्चों से उनकी रुचि मुताबिक चित्रकला,पेंटिग भी करवाई गई। 

न्यायाधीश श्रीमती द्विवेदी कहतीं है कि कोशिश रहेगी कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से मासूम बच्चे दो वक्त का भोजन करने के बाद थोड़ा खेलने व नींद निकालने तक ही सीमित नहीं होंगे। बल्कि उन्हें भी हुनर के दम पर अपना जीवन संवारने का अवसर मिल सके और वे भी समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। हुनरमंद होने की कोशिश में हथकरघा काम को शामिल करनें के निर्देश दिए गए हैं। जो इन्हें रोजगार दिला सके। कम्प्यूटर कोर्स के अलावा, ब्यूटी पार्लर, सिलाई, कढ़ाई,मोमबत्ती,अगरबत्ती निर्माण, बुनाई जैसे कामों को शामिल किया जाएगा। उन्होने जोड़ा कि बच्चों का अतीत भले ही अपराध से जुड़ा हुआ हो मगर आज ये बच्चे समाज के मुख्यधारा से जुड़ने की मंशा रख रहे हैं तो हमारा भी प्रयास है कि इन बच्चों के भविष्य निर्माण में मददगार बनें ।

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