संघ को साइडलाइन कर बांटे गए टिकट, बीजेपी ने नहीं दी रिपोर्ट को तव्वजो !

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने दो लिस्ट जारी कर दी हैं। इनमें 192 उम्मदीवारों की घोषणा की जा चुकी है। 38 सीटों पर ऐलान होना है। लेकिन इन सब के बीच बड़ी खबर आ रही है कि बीजेपी में इस बार संघ के सर्वे को तव्वजो नहीं दी गई है। संघ ने टिकट वितरण पर चिंता व्यक्त की है। संघ का कहना है कि मप्र में जमीनी स्तर पर भाजपा का कार्यकर्ता पार्टी से कट चुका है। चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाएगी। 

बीजेपी द्वारा घोषित लिस्ट में संघ के मुताबिक 30 टिकट नहीं दिए गए हैं। जिससे संघ ने नाराजगी जाहिर की है। हालांकि संघ की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संघ ने जिनके टिकट काटने का सुझाव दिया था उनमें से ज्यादातर सीएम शविराज सिंह चौहान के करीबी थे। शिवराज नहीं चाहते थे कि अधिक टिकट काटे जाएं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं वर्तमान विधायक टिकट कटने से बगावत ने कर दें और पार्टी के जीतना मुश्किल हो जाए। 

गौरतलब है कि प्रदेश में जहां जहां पार्टी के खिलाफ आक्रोश है, वहां संघ प्रचार करने के लिए निकलेंगे और भाजपा की जड़ों को गहरा करने का काम करेंगे। इसको लेकर बीजेपी और संघ के बीच हुई मंत्रणा में सहमति भी बन चुकी है। संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय किसान संघ और भारतीय मजदूर संघ भी इसमें उतरेंगे।  भोपाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन महामंत्री अतुल राय की संघ कार्यालय समिधा में बैठकें हुई थीं। पार्टी और संघ नेताओं के बीच बातचीत में कार्यकर्ताओं की नाराजगी खत्म करने के साथ ही प्रत्याशियों के चयन पर भी मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक संघ व पार्टी नेताओं के बीच प्रत्याशी चयन और क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर भी बातचीत हुई थी। सूत्रों के मुताबिक मालवा, निमाड़, चंबल, महाकोशल जैसे अलग-अलग इलाकों के लिए पार्टी अलग-अलग रणनीति अपनाएगी। सवर्णों की नाराजगी अभी भी संघ और भाजपा के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। जिसके चलते सवर्ण नेताओं को मैदान में उतारने की रणनीति बनाई गई है, जो पार्टी के खिलाफ बने माहौल को कम करेंगे।

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी द्वारा कराये गए सर्वे में भी यह सामने आया था कि पार्टी के 100 से ज्यादा विधायकों को हार का सामना करना पड़ सकता है। सर्वे रिपोर्ट में 104 विधायकों पर सीधे तौर पर हार का खतरा बताया गया था। चुनाव में भाजपा यदि शिवराज सरकार के मौजूदा सभी मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारती तो फिर आधे से ज्यादा मंत्रियों पर हार का खतरा होने की बात कही गई थी। पार्टी के तमाम सर्वे और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के फीडबैक के बाद अब संघ के फीडबैक ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी है|