मनरेगा में काम करने वाले एक मजदूर निकला 10 करोड़ का आसामी, ये है मामला

आयकर विभाग ने 15 दिन इस मामले की जांच पड़ताल करने के बाद शहडोल और उमरिया जिले में छापेमारी की थी। वही गांव वालों से पूछताछ के दौरान सच्चाई सामने आने पर आयकर विभाग ने इसकी पड़ताल की और कार्रवाई की है।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में लगातार आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा बेनामी संपत्ति मामले में शिकंजा कसा जा रहा है। लगातार आयकर विभाग प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई कर रही है। वही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है। जिसके कनेक्शन शहडोल (Shehdol) और उमरिया (Umariya) जिले से भी जुड़े हैं। जहां मनरेगा (MNREGA) में दिहाड़ी करने वाला एक मजदूर 10 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति का आसामी है।

दरअसल आयकर विभाग ने भोपाल (Bhopal) में बेनामी संपत्ति के लेनदेन में एक बड़ा खुलासा किया है। जिसमें 1 मजदूर के नाम 10 करोड़ रुपए की 33 एकड़ जमीन का पता चला है। आयकर विभाग द्वारा जाँच करने पर पता चला कि जमीन एक आदिवासी से खरीदी गई थी। जिसके मालिक उमरिया और शहडोल जिले के बड़े कॉन्ट्रैक्टर पद्म सिंघानिया हैं।आयकर विभाग को जाँच में यह भी पता चला है कि कांट्रेक्टर ने अपने यहां काम करने वाले एक दिहाड़ी मजदूर के नाम पर ये जमीन खरीदी है। इसके बाद आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति लेनदेन मामले के तहत कार्रवाई की है।

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जानकारी के मुताबिक पदम सिंघानिया ने मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 का भी उल्लंघन किया है। जिसमें यह नियम है कि एक आदिवासी की जमीन नियम अनुसार आदिवासी ही खरीद सकता है। जबकि सिंघानिया ने यह जमीन अपने आदिवासी नौकर के नाम से खरीदी है और बाद में अपने बेटे के नाम पर जमीन का ट्रांसफर करवा लिया है। इससे पहले आयकर विभाग ने 15 दिन इस मामले की जांच पड़ताल करने के बाद शहडोल और उमरिया जिले में छापेमारी की थी। वही गांव वालों से पूछताछ के दौरान सच्चाई सामने आने पर आयकर विभाग ने इसकी पड़ताल की और कार्रवाई की है।