BJP सांसद ने अपनी ही पार्टी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, पूछे दिग्विजय- जाएंगे लोकपाल के सामने

इसके साथ ही राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पूछा है कि क्या सुब्रमण्यम स्वामी लोकपाल के सामने तथ्यों के साथ जाएंगे।

digvijay singh

नई दिल्ली/भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। केंद्र (central) की भाजपा सरकार (bjp government) पर अब बीजेपी सांसद (bjp mp) ने ही सवाल उठा दिया है। बीजेपी सांसद ने केंद्र की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके एक बैंक डील (bank deal) में भारी भ्रष्टाचार की बात कही है। इतना ही नहीं इससे पहले भी भाजपा सांसद ने राफेल (Rafael) खरीद के समय भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसके बाद अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijay singh) ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

दरअसल 10 दिन पहले ही लक्ष्मी विलास बैंक (Laxmi Vilas Bank) और सिंगापुर के डीबीएस बैंक (DBS Bank of Singapore) की भारतीय इकाई के विलय की मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट ने दी थी। जिसके बाद आरबीआई (RBI) ने दोनों बैंकों के विलय की घोषणा की थी। अब इस मामले में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanyam Swami) ने दोनों बैंकों के विलय में भारी भ्रष्टाचार की बात कही है।

जिस पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भाजपा के सांसद भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने राफेल खरीद के समय भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पूछा है कि क्या सुब्रमण्यम स्वामी लोकपाल के सामने तथ्यों के साथ जाएंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोदी जी आपने कहा था “ना खाऊँगा ना खाने दूँगा”। अब आपके ही सांसद के आरोप पर कुछ कहिए। जाँच कराइए।

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बता दें कि पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने कैबिनेट बैठक में लक्ष्मी विलास बैंक (Laxmi vilas bank) और सिंगापुर के डीबीएस बैंक (DBS Bank) के विलय की बात कही थी। वहीं भारत में यह पहला मौका है जब देश में मुश्किल में फंसे किसी बैंक को डूबने से बचाने के लिए विदेशी बैंक की सहायता ली जा रही है। ज्ञात हो कि लक्ष्मी विलास बैंक पिछले 3 साल से घाटे में चल रही थी। लक्ष्मी विलास बैंक 94 साल पुराना बैंक है।

गौरतलब हो कि लक्ष्मी विलास बैंक और डीबीएस बैंक के विलय में भ्रष्टाचार की बात कांग्रेस नेता कृष्णन अय्यर (krishnan Iyer) ने भी की थी। अय्यर ने कहा था कि जब विदेशी बैंक डीबीएस को 840 करोड रुपए दिए ही जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ बैंक के 20000 करोड़ डिपाजिट दिए जा रहे हैं। सारी ब्रांच और पूरे एसेस्ट्स दिए जा रहे हैं। लायबिलिटी भी डीबीएस ले रही है तो 336 करोड़ के शेयर मुफ्त में देने का क्या कारण है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि बैंक को अगर फ्री में ही देना था तो किसी भारतीय बैंक में देते। सिंगापुर (singapore) किधर से आया। साउथ के पुराने बैंक जैसे कर्नाटका बैंक आदि में लक्ष्मी विलास बैंक के विलय करने से देश का पैसा देश में ही सुरक्षित रहता।

खैर अब इस मामले में तूल पकड़ना निश्चित है। वहीं बैंकों के विलय पर आगे कितने इल्जाम और लगते हैं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन बता दे कि यह पहला बैंक नहीं है। जिसे डूबने से बचाया गया है। इससे पहले सितंबर 2019 में पीएमसी बैंक और इस साल यस बैंक की स्तिथि को भी संभाला गया था।