मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बदलेंगे कमलनाथ सरकार का एक और फैसला

मध्य प्रदेश में 110 करोड़ रुपए की लागत से सात ऑटोमेटिक संयंत्र स्थापित किए गए थे। इसके बाद महिला स्वयं सहायता समूह की मदद से राशन तैयार कर गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार वितरण करती थी।

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। उपचुनाव (By-election) के बाद मध्य प्रदेश (Madhya pradesh) में स्थाई हो गई शिवराज सरकार (shivraj government) एक बार फिर कमलनाथ सरकार (Kamalnath government) के पुराने फैसले को पलटने जा रही है। दरअसल राज्य सरकार पोषण आहार का काम एमपी एग्रो (MP Agro) से वापस लेकर स्वयं सहायता समूह को देने की तैयारी कर रही है। इससे बड़ा फायदा यह होगा कि निजी कंपनियां (Private companies) पोषण आहार के सिस्टम से पूरी तरह से बाहर हो जाएंगी।

जानकारी के मुताबिक शिवराज कैबिनेट (shivraj cabinet) में जल्दी इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। शिवराज सरकार एमपी एग्रो से पोषण आहार वितरण का काम वापस लेकर इसे स्वयं सहायता समूह के हाथ देना चाहती है। इससे पहले भी 2017 में शिवराज सरकार ने एमपी एग्रो की जगह स्वयं सहायता समूह को ही पोषण आहार का काम सौंपा था।

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इसके बाद कमलनाथ सरकार के वापस प्रदेश में आते ही पोषण आहार पर 2019 में बड़ा फैसला लिया गया था। वही ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट को आधार बनाकर कमलनाथ सरकार ने आहार का काम एमपी एग्री को सौंप दिया था।हालांकि तब तत्कालीन कमलनाथ सरकार का भाजपा ने खुलकर विरोध किया था। वही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) ने कहा था कि पोषाहार वितरण में निजी कंपनियों, ठेकेदार की भूमिका खत्म करने के लिए स्वयं सहायता समूह को पोषण आहार के लिए चुना गया था।

बता दे कि मध्य प्रदेश में 110 करोड़ रुपए की लागत से सात ऑटोमेटिक संयंत्र स्थापित किए गए थे। इसके बाद महिला स्वयं सहायता समूह की मदद से राशन तैयार कर गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार वितरण करती थी। इसके साथ ही तत्कालीन सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी खामी के चलते पोषण आहार का काम स्वयं सहायता समूह से वापस लेकर एमपी एग्रो को सौंप दिया था। अब सरकार एक बार फिर पोषण आहार योजना को एमपी एग्रो से वापस लेकर सहायता समूह को सौंपने की तैयारी कर रही है।