मध्य प्रदेश

जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर जिले में जिस तरह से कोरोना अपने पैर पसार रहा है। उसको देखते हुए जबलपुर के निजी अस्पतालो सहित सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भी भर चुके है। शहर में कोरोना से हाहाकार मच चुका है। ऐसे में अब लोगो ने मांग की है कि जिला प्रशासन अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए लाज-होटल-धर्मशालाओं और अन्य बड़े स्थानों का उपयोग कोविड वार्ड के लिए करे।

अस्पतालों में नही बची जगह

जबलपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पलंग खाली नहीं है। कोरोना से पीडि़त मरीज बीमारी से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं। अब ऐसी स्थिति में जरूरत है जिला प्रशासन को और अतिरिक्त इंतजाम करे। जिससे कोविड के मरीजो को इलाज मिल सके। अब जरूरत आन पड़ी है कि प्रशासन को अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शहर में जितने भी होटल, लॉज हैं व धर्मशालाएं हैं। उनको अधिग्रहण करते हुए अपने कब्जे में लेते हुए इन विपरीत परिस्थतियों से निपटने के लिए अस्थाई अस्पताल बना दे ताकि शहर के नागरिकों की जान बचाई जा सके।

जबलपुर शहर के जानकार बताते है कि इस विषम परिस्थितियों में सबको आगे आना चाहिए और अपने शहर को बचाने के लिए हर तरह का सहयोग करना चाहिए। तभी जाकर कोविड मरीजों की जान बचाई जा सके। स्थानीय लोगो की माने तो जिला कलेक्टर व मप्र सरकार चाहे तो अधिग्रहण की कार्यवाही करते हुए अस्थाई अस्पतालों का निर्माण कर सकती है। जिससे कोरोना की भयाभय स्थिति से निपटा जा सकता है।

शहर में यहाँ बनाए जा सकते है कोविड के अस्थाई अस्पताल

जबलपुर शहर की नामचीन सभी होटल, जो कि थ्री। फॉर स्टॉर होटल। इसके अलावा अन्य होटलों को भी शामिल किया जा सकता है क्योंकि यहां पर आराम से सभी मरीजों को बेहतर रूप से अलग से कमरा, बाथरूम व अन्य आवश्यक सुविधाएं आसानी से मिल सकेगी। इन्हें अस्थाई अस्पताल बनाने में सिर्फ मेडिकल उपकरणों को स्थापित करना होगा व चिकित्सकीय टीम को तैनात भी आसानी से किया जा सकेगा।

  • जबलपुर शहर का मानस भवन एक बहुत बड़ा हाल रूपी भवन है।
  • जिसको भी अस्थाई अस्पताल बनाया जा सकता है।
  • मदनमहल के पास स्थित शहर के दद्दा परिसर में भी एक बेहतर व्यवस्था है।
  • जिसको भी अस्थाई अस्पताल के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
  • सामुदायिक भवन, धर्मशाला, तरंग ऑडिटोरियम, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज रांझी, ट्रिपल आईटी कॉलेज डुमना रोड आदि को अस्थाई अस्पताल बनाया जा सकता है।
  • शहर के सभी शासकीय व प्राईवेट स्कूल व कॉलेजों को अस्थाई अस्पताल बनाकर हजारों की संख्या में पीडि़तों की जान बचाई जा सकती है।

प्रशासन को करना होगा अपने अधिकारों का उपयोग

अस्थाई अस्पताल जहां पर जल्द से जल्द सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकती है। इसके लिए प्रशासन को अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्य करना चाहिए। जिससे शीघ्र ही अस्थाई अस्पतालों का निर्माण हो सके और कोरोना से पीडि़तों की जान बचाई जा सके।